जब गांधीजी ने भोपाल को समझाया था रामराज्य का मतलब

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जब गांधीजी ने भोपाल को समझाया था रामराज्य का मतलब

BY: MOHIT JAIN

देशभर में गांधी जयंती और दशहरा पर्व मनाया जा रहा है है, ऐसे में हम आपके लिए महात्मा गांधी से जुड़ा एक अनकहा किस्सा सामने लाए है। यह वाकया उस समय का है जब गांधीजी मध्यप्रदेश के दौरे पर आए थे और भोपाल पहुँचे थे। यहां उन्होंने स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए ‘रामराज्य’ की परिभाषा समझाई थी। गांधीजी ने कहा था कि रामराज्य का मतलब केवल धार्मिक राज्य नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श समाज है जहाँ हर किसी को बराबरी, न्याय और सम्मान मिले। उनका यह संदेश आज भी सामाजिक समरसता और शांति के लिए प्रासंगिक है।

गांधीजी का भोपाल आगमन और सभा

गांधीजी नवाब हमीदउल्लाह खान के विशेष आग्रह पर भोपाल पहुंचे थे। उनके साथ मीरा बेन, सी.एफ. एंड्रूज और महादेव भाई देसाई भी थे। इस अवसर पर जमुनालाल बजाज और डॉ. जाकिर हुसैन को भी आमंत्रित किया गया था।
बेनजीर मैदान पर आयोजित सभा में गांधीजी ने कहा:

“रामराज्य का मतलब हिंदू राज्य कतई नहीं है। मुसलमान भाई इसे गलत न समझें। मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है। मेरे लिए तो सत्य और सतकार्य ही ईश्वर है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्राचीन काल के रामराज्य का आदर्श, लोकतांत्रिक मूल्यों से बहुत हद तक मेल खाता था। उसमें गरीब से गरीब व्यक्ति भी अल्प समय और कम खर्च में न्याय प्राप्त कर सकता था।

गांधीजी को भोपाल से मिला जनसमर्थन

सभा के दौरान भोपाल की जनता ने गांधीजी को खादी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 1035 रुपए की थैली भेंट की। यही नहीं, जब 1933 में गांधीजी का ट्रेन बदलने के लिए भोपाल स्टेशन पर ठहराव हुआ, तब भी हजारों लोग उन्हें सुनने के लिए वहां पहुंच गए। “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

भोपाल प्रवास के दौरान स्वास्थ्य

अपने प्रवास के दौरान गांधीजी बीमार भी हुए थे। उन्हें बुखार आया, जिसका इलाज खिलाफत आंदोलन में उनके साथी रहे डॉ. अब्दुल रहमान ने किया। डॉ. रहमान ने उनके स्वास्थ्य को लेकर जनता के लिए बुलेटिन भी जारी किए।

इंदौर और हिंदी राष्ट्रभाषा की घोषणा

गांधीजी ने 1918 में इंदौर में आयोजित आठवें अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की। इसी सम्मेलन में उन्होंने यह घोषणा की कि भारत की आज़ादी के बाद हिंदी राष्ट्रभाषा होगी। इसके लिए उन्होंने काका कालेलकर की अध्यक्षता और पुत्र देवदास गांधी की भागीदारी में एक समिति भी गठित की थी।

गांधीजी और रजनीश (ओशो) का प्रसंग

जबलपुर में गांधीजी की मुलाकात दो बार आचार्य रजनीश (ओशो) से हुई। एक बार जब रजनीश बालक थे, तब उन्होंने गांधीजी को तीन रुपए दान किए। लेकिन कुछ देर बाद पेटी छीनकर कहा कि वे अपने गांव के गरीबों में ये पैसे बांटेंगे।
कस्तूरबा गांधी ने इस पर मजाक किया “आज आपको बराबरी का कोई मिला। अब आपके बक्से का बोझ किसी ने हल्का कर दिया।”

गांधीजी का संदेश और आज का संदर्भ

गांधीजी का “रामराज्य” का विचार धार्मिक सीमाओं से परे था। उनके अनुसार, यह एक ऐसी व्यवस्था थी जहां हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। आज भी यह संदेश भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए मार्गदर्शक है।

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