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मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मिली जगह: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी

BY: AAKASH SEN

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने इसे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

यूनेस्को ने चार ऐतिहासिक स्थलों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव सूची में शामिल किया है। इसमें शामिल धरोहरें हैं:
✔ मौर्यकालीन सम्राट अशोक के शिलालेख
✔ चौंसठ योगिनी मंदिर
✔ उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर
✔ बुंदेला शासकों के किले और महल

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्रमाणित करती है कि मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

यूनेस्को की सूची में मध्यप्रदेश की धरोहरें

मध्यप्रदेश में अब तक यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त 18 धरोहर स्थल हैं। इनमें से 3 स्थायी और 15 टेंटेटिव सूची में हैं।

✅ स्थायी सूची में शामिल धरोहरें:

  • खजुराहो के मंदिर समूह
  • भीमबेटका की गुफाएँ
  • सांची का स्तूप

✅ टेंटेटिव सूची में पहले से शामिल धरोहरें:

  • ग्वालियर किला
  • बुरहानपुर का खुनी भंडारा
  • चंबल घाटी के शैल कला स्थल
  • भोजेश्वर महादेव मंदिर (भोजपुर)
  • रामनगर (मंडला) के गोंड स्मारक
  • धमनार का ऐतिहासिक स्थल
  • मांडू के ऐतिहासिक स्मारक
  • ओरछा का ऐतिहासिक समूह
  • भेड़ाघाट-लमेटाघाट (नर्मदा घाटी)
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
  • चंदेरी का ऐतिहासिक महत्व

इन ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व

✔ मौर्यकालीन अशोक के शिलालेख
ये भारत के सबसे प्राचीन लिखित अभिलेख हैं, जो बौद्ध धर्म, शासन और नैतिकता पर सम्राट अशोक द्वारा अंकित संदेशों को दर्शाते हैं। मध्यप्रदेश में साँची, जबलपुर (रूपनाथ), दतिया (गुज्जरा) और सीहोर (पानगुरारिया) के शिलालेख इस सूची में शामिल किए गए हैं।

✔ चौंसठ योगिनी मंदिर
9वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान निर्मित चौंसठ योगिनी मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक हैं। इन गोलाकार संरचनाओं की वास्तुकला अद्वितीय मानी जाती है। मध्यप्रदेश के खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के मंदिर इस सूची में शामिल हुए हैं।

✔ गुप्तकालीन मंदिर
गुप्तकालीन मंदिरों को भारतीय मंदिर वास्तुकला का स्वर्ण युग माना जाता है। इनकी शिखर शैली और उत्कृष्ट नक्काशी दर्शनीय है। इस सूची में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) के मंदिर शामिल किए गए हैं।

✔ बुंदेला काल के किले और महल
बुंदेला शासकों की कला, सैन्य कौशल और स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण ये किले और महल हैं। इस सूची में गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहाँगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल शामिल किए गए हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर एमपी टूरिज्म बोर्ड, संस्कृति विभाग, पुरातत्वविदों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नए स्तर तक पहुँचाने में सहायक होगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।

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