Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर युवाओं का झुकाव अब आधुनिक कृषि की ओर बढ़ रहा है। बुरहानपुर के प्रतीक पाटील ने खेती में आने वाली यंत्रों की कमी को पहचाना और उसे अवसर में बदलते हुए खुद का ‘कृषि यंत्र बैंक’ स्थापित किया। आज वे क्षेत्र के दर्जनों किसानों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं।
ऑनलाइन लॉटरी से खुला स्वरोजगार का रास्ता
Madhya Pradesh प्रतीक ने बताया कि खेती में ट्रैक्टर और यंत्रों की समय पर अनुपलब्धता से फसल उत्पादन प्रभावित होता था। सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से उन्हें ‘निजी कस्टम हायरिंग स्कीम’ की जानकारी मिली। प्रतीक ने ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से उनका चयन हुआ। अक्टूबर 2025 में उन्होंने ‘‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’’ की स्थापना की।
20.5 लाख की लागत और ₹10 लाख तक का अनुदान
Madhya Pradesh प्रतीक को योजना के तहत करीब 20.5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इससे उन्होंने ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन और थ्रेशर जैसे आधुनिक उपकरण खरीदे। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में ही वे ₹2.6 लाख से अधिक का कार्य कर चुके हैं। आज वे आसपास के लगभग 40 किसानों को उचित किराये पर यंत्र उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे किसानों के समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
क्या है कस्टम हायरिंग स्कीम और कैसे लें लाभ?
Madhya Pradesh मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2012-13 से संचालित इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर कृषि उपकरण दिलाना और युवाओं को रोजगार देना है।
- अनुदान: 25 लाख तक की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख) तक का अनुदान मिलता है।
- पात्रता: आवेदक 12वीं पास हो, आयु 18 से 40 वर्ष के बीच हो और उसके पास स्वयं की भूमि का प्रमाण पत्र हो।
- प्रक्रिया: योजना का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से होता है।





