पीओके में हड़कंप: झेलम नदी में अचानक बाढ़—क्या यह भारत की कार्रवाई थी?
आज पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में अचानक झेलम नदी का जलस्तर बढ़ने से हाहाकार मच गया। मुज़फ़्फ़राबाद में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से चेतावनी दी गई, और लोग सुरक्षित स्थानों पर भागने लगे।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है: क्या यह प्राकृतिक आपदा थी या भारत की कोई सोची-समझी रणनीति?
पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने बिना चेतावनी दिए पानी छोड़ा—जिसे वह “जल आतंकवाद” बता रहा है। वहीं, भारत की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
चलिए, पूरा मामला समझते हैं।
क्या हुआ है?
- नदी में अचानक उफान: दोपहर करीब 12 बजे झेलम नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा, जिससे हट्टियाँ बाला, गढ़ी दुपट्टा और मझोई जैसे इलाके जलमग्न हो गए।
- इमरजेंसी लागू: मुज़फ़्फ़राबाद प्रशासन ने तुरंत बाढ़ चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।
- सोशल मीडिया पर तूफान: नदी के उफान की वीडियोज़ वायरल हो रही हैं, जिनमें पाकिस्तानी यूजर्स भारत पर “पानी को हथियार बनाने” का आरोप लगा रहे हैं।
गढ़ी दुपट्टा के एक शख्स ने बताया:
“किसी को खबर तक नहीं थी—अचानक पानी बढ़ा और लोग जान बचाकर भागने लगे।”
पाकिस्तान का दावा: “पहलगाम हमले का बदला?”
यह घटना ठीक उसी हफ्ते हुई है जब पहलगाम आतंकी हमले में 27 हिंदू पर्यटकों को मार दिया गया था। भारत ने इसके जवाब में:
- सिंधु जल समझौता (IWT) निलंबित किया
- अटारी-वाघा बॉर्डर बंद किया
- पाकिस्तानी वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़ने को कहा
अब पाकिस्तान कह रहा है कि भारत ने जानबूझकर पानी छोड़कर एक और “जवाबी कार्रवाई” की है।
पाकिस्तानी विश्लेषक जावेद सिद्दीकी ने कहा:
“भारत ने सिंधु समझौते को रद्द करने की धमकी को अमली जामा पहना दिया है। यह पानी का उफान उनका संदेश है—आतंकवाद की कीमत चुकानी पड़ेगी।”
लेकिन क्या कोई सबूत है?
भारत की तरफ से अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश या बाँधों से पानी छोड़ने की वजह से भी ऐसा हो सकता है।
क्या यह बड़े संघर्ष की शुरुआत है?
सिंधु जल समझौता (1960) तीन युद्धों के बाद भी कायम रहा। लेकिन अगर भारत ने सच में पानी को हथियार बनाया, तो यह एक खतरनाक मोड़ होगा।
- पाकिस्तान की अगली चाल? पाकिस्तान ने पहलगाम हमले की “निष्पक्ष जाँच” की माँग की है, जबकि ईरान और सऊदी अरब ने मध्यस्थता की पेशकश की है।
- वैश्विक चिंता: अगर जल युद्ध शुरू हुआ, तो पूरे दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ सकता है।
बड़ी तस्वीर: क्या पानी अब हथियार बन गया है?
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद नया नहीं है। लेकिन अगर भारत ने झेलम जैसी नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करने की रणनीति अपनाई, तो यह गेम-चेंजर हो सकता है।
क्यों?
- रणनीतिक बढ़त: भारत के पास ऊपरी हिस्सों में बाँध हैं, जिससे वह पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है।
- मनोवैज्ञानिक असर: बाढ़ से आतंक फैलता है, जीवन अस्त-व्यस्त होता है, और पाकिस्तान का संकट प्रबंधन चरमराता है।
लेकिन क्या भारत वाकई ऐसा कर रहा है? अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं—लेकिन समय बहुत संदेहास्पद है।
आगे क्या होगा?
- क्या पाकिस्तान कूटनीतिक स्तर पर कोई कार्रवाई करेगा?
- क्या भारत पानी छोड़ने पर अपना पक्ष रखेगा?
- क्या यह एक पूर्ण “जल युद्ध” में बदल सकता है?
एक बात तो तय है: सिंधु समझौता अब खतरे में है।
अंतिम विचार
अगर भारत ने सच में पानी को हथियार बनाया, तो यह एक साहसिक और अभूतपूर्व कदम है। लेकिन बिना सबूत के पाकिस्तान के दावे अटकलें ही हैं।
एक बात स्पष्ट है: तनाव चरम पर है।
हम इस मामले पर नज़र बनाए हुए हैं। अपडेट्स के लिए बने रहें।





