‘मां’ फिल्म रिव्यू: काजोल की माइथोलॉजिकल हॉरर में काली का रूप, डर और मां का बलिदान

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बॉलीवुड हॉरर अब केवल डराने तक सीमित नहीं रहा। आने वाली फिल्म ‘मां’ इस बात का प्रमाण है कि भारतीय पौराणिक कथाओं और इमोशनल स्टोरीटेलिंग को जबरदस्त हॉरर के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है। काजोल इस फिल्म में एक मां के रूप में नजर आएंगी जो अपनी बेटी की रक्षा के लिए राक्षसी शक्तियों से टकराती हैं – एक ऐसी भूमिका जो देवी काली की तरह शक्ति और साहस से भरपूर है।

‘मां’ से एक नए ‘माइथो हॉरर’ सबजॉनर की शुरुआत

निर्देशक विशाल फुरिया, जिन्हें छोरी’ जैसी हॉरर फिल्म के लिए जाना जाता है, ‘मां’ के साथ फिर लौटे हैं – लेकिन इस बार कुछ अलग लेकर। यह फिल्म एक माइथोलॉजिकल हॉरर है, जो हॉलीवुड की नई माइथोलॉजी की तरह नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध धार्मिक कथाओं पर आधारित है।

क्यों यह फिल्म खास है:

  • यह अजय देवगन और आर. माधवन की फिल्म ‘शैतान’ की यूनिवर्स का हिस्सा है।
  • पहली बार भारतीय माइथोलॉजी को इस स्तर पर हॉरर शैली में दिखाया गया है।
  • काजोल का अभिनय और ट्रेलर में दिखाया गया उनका इंटेंस लुक पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है।

फिल्म की कहानी: डर, बलिदान और मां की शक्ति

‘मां’ की कहानी एक रहस्यमयी गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां छोटी बच्चियां रहस्यमय तरीके से गायब हो रही हैं। यह गांव एक प्राचीन श्राप से ग्रस्त है। फिल्म में बलि जैसे पौराणिक तत्वों को डरावने अंदाज में पेश किया गया है, जो दर्शकों को बांधकर रखते हैं।

मुख्य प्लॉट बिंदु:

  • एक मां और बेटी की भावनात्मक यात्रा
  • एक श्रापित गांव में छुपे काले रहस्य
  • काली की तरह बुरी शक्तियों का नाश करती नायिका
  • माताओं को श्रद्धांजलि: फिल्म के क्रेडिट में एक्टर्स और क्रू की माताओं के नाम भी शामिल होंगे

काजोल का दमदार कमबैक और VFX का जादू

‘गुप्त’ जैसी थ्रिलर में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुकी काजोल इस बार और भी इंटेंस रोल में हैं। ट्रेलर में उनका तेजस्वी और भावनात्मक अभिनय देखते ही बनता है। फिल्म के वीएफएक्स और सिनेमैटोग्राफी पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे पौराणिक रहस्य और हॉरर का बेहतरीन संतुलन बनता है।

काजोल के इस किरदार की खास बातें:

  • देवी काली जैसी शक्ति का प्रतीक
  • एक मां की भावनाओं और हिम्मत का गहरा चित्रण
  • भारतीय पौराणिक कथाओं के साथ आधुनिक सिनेमाई तकनीक का मेल

हॉरर जॉनर का नया युग

निर्देशक विशाल फुरिया ने कहा:

“मैं पिछले 10 साल से हॉरर फिल्में बना रहा हूं। लेकिन अब लगता है कि भारत में प्योर हॉरर का असली युग शुरू हो गया है – और वह शुरू हुआ ‘शैतान’ से। ‘मां’ उस यात्रा का अगला पड़ाव है।”

फिल्म क्यों देखनी चाहिए?

अगर आप भारतीय माइथोलॉजी, हॉरर और इमोशनल स्टोरीटेलिंग का मिश्रण देखना चाहते हैं, तो ‘मां’ आपके लिए एक परफेक्ट सिनेमाई अनुभव है। यह सिर्फ डराने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि एक मां के साहस, बलिदान और अडिग प्रेम की कहानी है – जो आपको सोचने पर मजबूर करेगी।


निष्कर्ष:
फिल्म ‘मां’ सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है – यह एक नई शैली, एक नया एक्सपीरियंस और एक नई शुरुआत है। भारतीय सिनेमा के इस नये अध्याय को मिस न करें।

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