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Jhansi Medical College fire incident: क्या थी हादसे की असली वजह? मेडिकल कॉलेज के पाचार्य ने कर दिया बड़ा खुलासा

Jhansi Medical College fire incident

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार देर रात मेडिकल कॉलेज के नीकू वार्ड में आग की दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। सीएम योगी के निर्देश पर आलाधिकारियों ने मोर्चा संभाला, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिये 15 से 20 मिनट में ज्यादातर बच्चों को सकुशल और सुरक्षित निकाला गया। सभी बच्चों को पीकू वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां सभी सकुशल हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की मॉनीटरिंग और अधिकारियों से बातचीत करते रहे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतक बच्चों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही अधिकारियों को पीड़ितों को हर संभव मदद के निर्देश दिये।

डिप्टी सीएम ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात, हर संभव मदद का दिया आश्वासन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज के नीकू वार्ड में आग की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए उच्च अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिये। सीएम योगी के निर्देश के बाद डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान झांसी के सभी आलाधिकारी कमिश्नर, डीआईजी, डीएम, एसएसपी समेत स्वास्थ्य महकमे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सीएम योगी आदित्यनाथ की सक्रियता से ही बड़ी घटना को मिनटों में कंट्रोल कर लिया गया। साथ ही नीकू वार्ड में भर्ती ज्यादातर बच्चों को पीकू वार्ड में शिफ्ट किया गया। सभी बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। वहीं डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हे सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं मामले की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। योगी सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उनकी हर संभव मदद के लिए योगी सरकार कटिबद्ध है। सीएम योगी के निर्देश पर मृतक बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायल बच्चों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है।

रेस्कयू किये गये बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ्य, बर्न या सफोकेशन इंजरी नहीं
झांसी के डीएम अविनाश कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही दमकल और बचाव की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। इसके अलावा सभी वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य महकमे के सभी अधिकारी मौके पर पहुंच गये थे। सभी ने तेजी के साथ बचाव राहत कार्यों को अंजाम दिया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि रेस्क्यू किये गए बच्चों को मेडिकल कॉलेज के अन्य वार्डों, जिला अस्पताल और निजी नर्सिंग होम्स में भर्ती कराया गया है। सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनमें किसी भी तरह की बर्न या सफोकेशन की इंजरी नहीं है।

पूरी तरह से काम कर रहे हैं फायर फाइटिंग इक्यूपमेंट, जून में हुआ था मॉक ड्रिल
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि झांसी के मेडिकल कॉलेज की घटना अत्यंत दुखद है। सीएम योगी ने खुद मामले का संज्ञान लिया। प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। घटना के कई चरणों में जांच के निर्देश दिये गये हैं। घटना की पहली जांच शासन स्तर से स्वास्थ्य महकमा, दूसरी जांच जिला पुलिस और फायर विभाग करेगा। इसके अलावा तीसरी मजिस्ट्रियल जांच होगी। घटना के कारण का पता लगाया जाएगा। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो कड़ी कार्रवाई करेंगे। योगी सरकार बच्चों और परिजनों के साथ पूरी से खड़ी है। हमारे स्टाफ, चिकित्सकों, बचाव दल ने बहादुरी के साथ बच्चों को बचाने का काम किया है। प्राथमिकता के आधार पर बच्चों की देखरेख की जा रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सभी फायर फाइटिंग इक्यूपमेंट पूरी तरह से ठीक थे। यहां फरवरी में फायर सेफ्टी ऑडिट और जून में मॉक ड्रिल भी किया गया था।

हादसे की चपेट में आए 54 नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया गया: सीएम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि झांसी रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नीकू वार्ड में नवजात बच्चों का इलाज किया जाता है। यहां समय से पहले जन्मे, कम वजन समेत गंभीर बीमारी के बच्चों का इलाज किया जाता है। मेडिकल काॅलेज में देर रात अचानक शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने से दर्दनाक घटना घटित हुई। हादसे में 10 नवजात बच्चे चपेट में आये जबकि 54 नवजात को सकुशल सुरक्षित निकाला गया। सभी बच्चों को रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिये बचाया गया। वहीं देर रात डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को मौके पर भेजा गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मासूम बच्चों को खोने वाले परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।

डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर, प्राचार्य, झांसी रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज

मेडिकल कॉलेज में कुल 146 फायर डिस्टिंगशर सिस्टम लगे हुए हैं। हादसे के समय नीकू वार्ड के फायर डिस्टिंगशर का उपयोग भी किया गया था। इन सभी उपकरणों को समय-समय पर ऑडिट भी किया जाता है। इस दौरान कमियों को दूर किया जाता है। फरवरी में इन सभी का ऑडिट किया गया था जबकि जून में मॉक ड्रिल की गयी थी। मेडिकल कॉलेज में फायर डिस्टिंगशर के खराब होने की बात पूरी तरह से निराधार है। वार्ड में शार्ट सर्किट से आग लगी थी। हादसे की जांच की जा रही है।

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