BY: Yoganand Shrivastva
टोक्यो, चीन के आक्रामक सैन्य रवैये और गतिविधियों को लेकर जापान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। जापान सरकार ने चीन की कार्रवाइयों को सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती करार देते हुए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में जापान ने अपने दक्षिण-पश्चिमी तटों और प्रशांत महासागर के आसपास सैन्य उपस्थिति को और बढ़ा दिया है।
जापान के रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में चीन पर निशाना
मंगलवार को जापान के रक्षा मंत्रालय द्वारा कैबिनेट को सौंपी गई वार्षिक रक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि ताइवान क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरे और रूस-चीन के संयुक्त अभियानों के कारण जापान की सुरक्षा के लिए नई और गंभीर चुनौतियां पैदा हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी वैश्विक अस्थिरता का दौर चल रहा है।”
सैन्य शक्ति में लगातार हो रहा है इज़ाफा
जापान सरकार पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों में सैन्य विस्तार कर रही है और अब वह लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें तैनात करने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में जापान ने मिसाइल परीक्षण भी किया, जिसका उद्देश्य चीन के संभावित हमलों का जवाब देने की क्षमता हासिल करना है।
ताइवान पर चीन की मंशा से चिंतित जापान
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की ओर से ताइवान को बलपूर्वक कब्जाने की धमकियां क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल रही हैं। जापान, जो कि ताइवान के बेहद नजदीक स्थित है, इस तनाव को अपने राष्ट्रीय हितों के लिए सीधा खतरा मानता है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल
जापान ने चेतावनी दी है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्तियों का संतुलन बिगड़ रहा है, और आने वाले समय में सैन्य टकराव की आशंका और बढ़ सकती है। खासकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर रिपोर्ट में चिंता जताई गई है।
विमानों की तैनाती को लेकर भी विवाद
जापान ने चीन से यह भी शिकायत की है कि वह बार-बार जापानी टोही विमानों के पास अपने लड़ाकू विमान उड़ा रहा है, जिससे टकराव की आशंका बनी रहती है। जवाब में चीन ने जापान पर आरोप लगाया है कि वह जासूसी के मकसद से चीनी वायुसीमा के पास उड़ानें संचालित कर रहा है।
सैन्य टकराव की ओर बढ़ता क्षेत्र
जापान की इस रिपोर्ट और सैन्य गतिविधियों से साफ है कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। चीन के साथ क्षेत्रीय विवादों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए जापान अब अपने रक्षा तंत्र को और मजबूत कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में राजनयिक और सामरिक स्तर पर बड़ी हलचलें देखने को मिल सकती हैं।





