Isa Ahmad
Jamwant Project Failure: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। भालुओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये की जामवंत योजना संचालित की जा रही है, लेकिन मरवाही वनमंडल में भीषण गर्मी और जल संकट के कारण एक मादा भालू की मौत ने इस योजना की प्रभावशीलता पर संदेह बढ़ा दिया है।
Jamwant Project Failure: भीषण गर्मी और जल संकट ने वन्यजीवों की जिंदगी ली
Jamwant Project Failure: मरवाही रेंज के पिपरिया गांव से लगे जंगल में ग्रामीणों ने मादा भालू का शव देखा। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मादा भालू की मौत का कारण हीट स्ट्रोक और अत्यधिक तापमान बताया गया। मरवाही वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने पुष्टि की कि लू और बढ़ते तापमान के प्रभाव से भालू दम तोड़ गया।
इस घटना ने जंगलों में तेजी से बढ़ रहे जल संकट और वन्यजीवों के लिए पर्याप्त राहत की कमी की ओर ध्यान खींचा। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम जलस्रोत और पेयजल प्रबंधन समय रहते नहीं किए गए तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
Jamwant Project Failure: जामवंत योजना की जमीन पर प्रभावशीलता पर सवाल
Jamwant Project Failure: वन विभाग ने पंचनामा और वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद मृत भालू का अंतिम संस्कार किया। विभाग ने वन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा, कृत्रिम जलस्रोतों की निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
लेकिन सवाल अब भी कायम है: करोड़ों रुपये की जामवंत योजना के बावजूद अगर भालू हीट स्ट्रोक से मर रहे हैं, तो योजना का लाभ वास्तव में वन्यजीवों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुँच रहा है।
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इस घटना ने छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और जल प्रबंधन की नीतियों पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है और जनता व विशेषज्ञ दोनों इस दिशा में सुधार की मांग कर रहे हैं।





