Report: Somnath mishra
Jabalpur : राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने हालिया घटनाक्रमों पर मीडिया से मुखातिब होते हुए अपनी बेबाक राय साझा की। उन्होंने शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद के साथ हुए व्यवहार को अनुचित बताते हुए जहां कड़ी निंदा की, वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की न्यायिक सक्रियता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
धर्मगुरुओं के सम्मान से समझौता नहीं
Jabalpur शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार पर विवेक तन्खा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मगुरु के साथ अशोभनीय व्यवहार लोकतंत्र और संस्कृति के खिलाफ है। तन्खा के अनुसार, विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन गंगा जैसे पावन तट पर स्नान के लिए जा रहे संत को रास्ते में रोकना पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म आस्था का केंद्र है और महापुरुषों का मान-सम्मान हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए।
ममता बनर्जी के कानूनी रुख की ऐतिहासिक प्रशंसा
Jabalpur पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने को तन्खा ने “ऐतिहासिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि देश में संभवतः यह पहला मौका है जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) की बेंच के सामने इतनी स्पष्टता और तर्कों के साथ अपनी बात रखी है। तन्खा ने उनके इस साहसी कदम की सराहना करते हुए इसे संघीय ढांचे और न्यायिक गरिमा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
बजट को बताया दिशाहीन और औसत
Jabalpur केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट पर टिप्पणी करते हुए विवेक तन्खा ने इसे पूरी तरह “औसत” करार दिया। उन्होंने बजट की कमियों को रेखांकित करते हुए तीन मुख्य बातें कहीं:
- रोजगार का अभाव: बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन की कोई ठोस रूपरेखा नहीं दिखी।
- क्षेत्रीय उपेक्षा: जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र के विकास के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया, जिससे स्थानीय जनता में निराशा है।
- उत्साह की कमी: उन्होंने कहा कि इस बजट ने देश के किसी भी वर्ग में कोई नया उत्साह पैदा नहीं किया है, क्योंकि इसमें जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों की अनदेखी की गई है।





