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ईरान भारत से चीता संरक्षण की तकनीक सीखना चाहता है: तेजी से घट रही आबादी पर खुलासा

BY: Yoganand Shrivastva

ईरान में एशियाई चीता की आबादी बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। ताजा आरटीआई में खुलासा हुआ है कि इस संकट से निपटने के लिए ईरान अब भारत से चीता संरक्षण और प्रबंधन सीखने में रुचि दिखा रहा है। भारत ने हाल ही में अफ्रीकी चीतों को दोबारा बसाने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है, जिसने वैश्विक ध्यान खींचा है।

क्यों घट रही है ईरान में चीता की संख्या?

ईरान में एशियाई चीता (Asiatic Cheetah) कभी बड़ी संख्या में पाए जाते थे। लेकिन अब हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।

  • 2010 में संख्या: करीब 100
  • 2022 में बची संख्या: केवल 12
  • मुख्य कारण:
    • अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष
    • आवास नष्ट होना और बंटवारा
    • आर्थिक संकट और प्रतिबंधों की वजह से संरक्षण प्रयासों में बाधा
    • प्राइमरी शिकार जानवरों की कमी
    • खनिज समृद्ध क्षेत्रों में चीता आवास का अतिक्रमण

भारत से चीता प्रबंधन सीखने की ईरान की कोशिश

एक RTI से पता चला है कि ईरान ने भारत के ‘चीता प्रोजेक्ट’ और प्रबंधन पद्धतियों में गहरी रुचि दिखाई है।

  • सरकार की ‘चीता परियोजना संचालन समिति’ के अध्यक्ष राजेश गोपाल ने यह जानकारी एक बैठक में साझा की थी।
  • उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने भारत से चीता प्रबंधन सीखने की इच्छा जताई है।

हालांकि, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने फिलहाल किसी औपचारिक प्रस्ताव से इनकार किया है।

भारत में चीता रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम की प्रगति

भारत ने अफ्रीकी चीतों को दोबारा बसाने के लिए एक वैश्विक स्तर पर सराहा गया कार्यक्रम शुरू किया है:

  • सितंबर 2022 से अब तक:
    • 20 चीते लाए गए:
      • 8 नामीबिया से
      • 12 दक्षिण अफ्रीका से
    • अगला चरण: बोत्सवाना से 8 चीते, जिनमें से पहले 4 मई 2025 तक भारत आने वाले हैं

इससे पहले भारत ने 1970 के दशक में ईरान के शाह से एशियाई चीते लाने की चर्चा शुरू की थी, लेकिन ईरान में संख्या कम होने और आनुवंशिक समानता को देखते हुए यह योजना रद्द कर दी गई।

क्या इंटरनेशनल सहयोग बढ़ेगा?

राजेश गोपाल ने यह भी सुझाव दिया कि भारत के नेतृत्व में ‘इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस’ अन्य देशों को भी चीता संरक्षण की जानकारी और ट्रेनिंग देने में मदद कर सकता है। इससे ईरान जैसे चीता रेंज वाले देशों को भी लाभ हो सकता है।

ईरान में संरक्षण की चुनौतियाँ

  • ईरान-इराक युद्ध और 1979 की क्रांति के बाद से वन्यजीव संरक्षण लगातार प्रभावित हुआ है।
  • संरक्षण NGO ईरानी चीता सोसाइटी (ICS) के अनुसार:
    • 1970 के दशक में 400+ चीतों की संख्या अब घटकर कुछ ही रह गई है।
    • अधिकांश चीता आवास अब खनिज संसाधनों से भरपूर हैं, जहां अतिक्रमण और शिकार दोनों बढ़े हैं।

भारत का चीता रीइंट्रोडक्शन मॉडल अब केवल घरेलू परियोजना नहीं, बल्कि एक वैश्विक उदाहरण बनता जा रहा है। ईरान जैसे देश इसकी सफलता को देखते हुए इससे सीखना चाहते हैं। आने वाले वर्षों में यह सहयोग वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है।