BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तल्खी अब खाड़ी देशों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। शुक्रवार सुबह ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों में कुवैत के एक प्रमुख डीसैलिनेशन प्लांट (समुद्री पानी को मीठा बनाने वाला संयंत्र) को भारी नुकसान पहुँचा है। इस हमले के बाद पूरे अरब जगत में पीने के पानी की आपूर्ति को लेकर चिंता की लहर दौड़ गई है।

New Delhi जीवन रेखा पर प्रहार: 90% पानी की आपूर्ति संकट में
कुवैत के लिए डीसैलिनेशन प्लांट किसी जीवन रेखा से कम नहीं हैं, क्योंकि देश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी पीने के पानी के लिए इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर है। कुवैत सरकार के अनुसार, शुक्रवार तड़के एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने के बाद ड्रोन ने जल शोधन संयंत्र पर हमला किया। हालांकि नुकसान का विस्तृत ब्यौरा अभी साझा नहीं किया गया है, लेकिन प्लांट के महत्वपूर्ण हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने से जल संकट का खतरा पैदा हो गया है।

New Delhi जंग का नया हथियार बने जल संयंत्र
इस त्रिकोणीय युद्ध में अब बुनियादी ढांचे, विशेषकर डीसैलिनेशन प्लांटों को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआत में ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अपने संयंत्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब ईरान ने खाड़ी के अरब देशों में मौजूद इन महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। रेगिस्तानी इलाकों में समंदर के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले ये प्लांट अगर लंबे समय तक बंद रहते हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ेगा।

New Delhi संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: पानी के बाद अब भुखमरी का डर
युद्ध की आग केवल जल संकट तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वैश्विक स्तर पर खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। FAO फूड प्राइस इंडेक्स के मुताबिक, मार्च महीने में दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम दिसंबर के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं। फरवरी की तुलना में कीमतों में 2.4 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंग नहीं रुकी, तो खाड़ी देशों को पानी और भोजन दोनों की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
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