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इंदौर: पलासिया पुलिस ने पकड़े तीन आरोपी, थार जीप और अर्टिगा कार बरामद

इंदौर से थार लेकर फरार हुआ, अमृतसर में गिरवी रख दी थी

रिपोर्ट: चेतन सिंह

इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कार चोरी में संलिप्त थे। आरोपियों ने छह महीने पहले एक थार जीप को सफाई कराने के बहाने लिया और फिर उसे वापस नहीं लौटाया। आरोपी ने इस जीप को अमृतसर में गिरवी रख दिया था। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो एक और गाड़ी चोरी के बारे में खुलासा हुआ।पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मनीष दंडोतिया, सूरज उर्फ भूरा रघुवंशी, और हेमंत सेन शामिल हैं। इनसे एक थार जीप और एक अर्टिगा कार बरामद की गई है। मनीष दंडोतिया अक्टूबर 2024 में अनिल पाटीदार के यहां ड्राइवर की नौकरी करने आया था। लगभग 15 दिन बाद ही उसने सफाई कराने के बहाने थार जीप लेकर फरार हो गया। बाद में मनीष ने अमृतसर में हेमंत के साथ मिलकर गाड़ी को गिरवी रख दिया।

इस मामले में एसीपी तुषार सिंह की अगुवाई में एक टीम बनाई गई थी, जिसने अमृतसर जाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनसे अन्य चोरी की वारदातों के बारे में पूछताछ शुरू कर दी है।

हाईटेक युग में कार चुराना क्यों हुआ आसान?

आजकल के हाईटेक युग में जहां तकनीक ने कई समस्याओं का समाधान किया है, वहीं यह अपराधियों के लिए भी एक नया अवसर बन गई है। कार चुराना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, क्योंकि:

  1. कार में लगी आधुनिक तकनीक: कई नई कारों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम, इंटेलिजेंट लॉकिंग सिस्टम और फिंगरप्रिंट सेंसर जैसे अत्याधुनिक फीचर्स होते हैं, लेकिन इन सिस्टमों को तकनीकी रूप से शरारती तरीके से हैक या बाईपास किया जा सकता है। चोर अब इन सिस्टमों का इस्तेमाल अपनी कार चोरी की योजनाओं में कर सकते हैं।
  2. कागजी दस्तावेजों में छेड़छाड़: अपराधी अब झूठे दस्तावेज़ तैयार करने में माहिर हो गए हैं, जिनकी मदद से वे चोरी की गाड़ियों को आसानी से बेच सकते हैं या गिरवी रख सकते हैं। कारों की असली मालिक की जानकारी छुपाना आसान हो गया है, जिससे वाहन की पहचान मुश्किल हो जाती है।
  3. सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केट: सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर चोरी की गाड़ियां बिकने का खतरा बढ़ गया है। इससे चोरों के लिए वाहन को बेचने और जल्दी से गायब करने के अवसर मिलते हैं।
  4. प्रोफेशनल गैंग्स का सक्रिय होना: आजकल पेशेवर चोर गैंग्स बन गए हैं, जो एक संगठित तरीके से चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। यह गैंग्स गाड़ियों को चुराने के बाद उन्हें दूसरे शहरों में भेजते हैं, जहां इन गाड़ियों को जल्दी बेचा जा सकता है।
  5. कम सुरक्षा उपाय: कई बार कार मालिकों की लापरवाही भी इस प्रकार की घटनाओं का कारण बनती है। यदि कार मालिक अपनी गाड़ी के लॉक और सुरक्षा उपकरणों को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करता, तो चोर के लिए काम आसान हो जाता है।

इस प्रकार, तकनीकी तरक्की और संगठित अपराधियों की वजह से अब कार चोरी एक और अधिक आसान कार्य बन चुका है। ऐसे में नागरिकों को अपनी गाड़ियों की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए और पुलिस को इस प्रकार के अपराधों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।

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