Water Conservation Awareness : प्रधानमंत्री कार्यालय ने जल संरक्षण सुझाव पर किया त्वरित संज्ञान
Water Conservation Awareness : इंदौर। देश में बढ़ते जल संकट और जल संरक्षण को लेकर दिए गए सुझाव पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा त्वरित संज्ञान लिए जाने पर वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. ए.के. द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इसे जनभागीदारी आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था का सकारात्मक उदाहरण बताया।

Water Conservation Awareness : ‘मन की बात’ के माध्यम से जागरूकता अभियान का दिया था सुझाव
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने 25 मई 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आगामी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पानी बचाने के उपायों पर विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया और इसकी आधिकारिक सूचना भी उन्हें उपलब्ध कराई।

Water Conservation Awareness : नागरिकों के सुझावों को महत्व देना लोकतंत्र की मजबूती
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि किसी सामान्य नागरिक द्वारा राष्ट्रहित में दिए गए सुझाव पर त्वरित कार्रवाई होना लोकतंत्र की सशक्त भावना को दर्शाता है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार नागरिकों के रचनात्मक विचारों और जनहित से जुड़े सुझावों को गंभीरता से सुनती और उन पर कार्रवाई करती है।
Water Conservation Awareness : जल संरक्षण केवल पर्यावरण नहीं, राष्ट्रीय दायित्व भी
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, कृषि, जल सुरक्षा और सतत विकास से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। यदि जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जाए तो देश में जल संकट की चुनौती का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।
Water Conservation Awareness : दैनिक जीवन में अपनाएं जल बचाने के उपाय
डॉ. द्विवेदी ने नागरिकों से अपील की कि वे जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि फल और सब्जियां धोने के बाद बचा पानी पौधों में उपयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार एयर कंडीशनर से निकलने वाले पानी को भी संग्रहित कर वृक्षों और पौधों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पौधों को सीधे पाइप से पानी देने के बजाय स्प्रिंकलर या फव्वारा पद्धति अपनाने से पानी की बचत होती है और पौधों की वृद्धि भी बेहतर होती है।

Water Conservation Awareness : वर्षा जल संचयन और वृक्षारोपण पर दिया जोर
डॉ. द्विवेदी ने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, जल के अनावश्यक उपयोग को रोकने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को जल के महत्व के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके।
Water Conservation Awareness : आने वाली पीढ़ियों के लिए अभी से करना होगा प्रयास
उन्होंने कहा कि पहले नदियों, तालाबों और झरनों में प्रचुर मात्रा में पानी देखने को मिलता था, लेकिन आज पानी बोतलों में सिमटता जा रहा है। यदि समय रहते जल संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
Water Conservation Awareness : प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
डॉ. द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्व के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उनके सुझाव पर शीघ्र कार्रवाई किए जाने को नागरिक सहभागिता के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण बताया।

Water Conservation Awareness : जल बचाने का संकल्प लेने की अपील
अंत में डॉ. द्विवेदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जल बचाने, वर्षा जल संचयन करने, अधिक वृक्ष लगाने और अगली पीढ़ी को जल का महत्व समझाने का संकल्प लेना चाहिए। उनका संदेश था—“हर बूंद बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।”
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