Indore इंदौर का वैश्विक नवाचार: मरीन इंजीनियर ने विकसित की पानी बचाने वाली क्रांतिकारी तकनीक

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Indore स्वच्छता में देश का सिरमौर रहने के बाद अब इंदौर जल शोधन (Water Purification) के क्षेत्र में भी दुनिया को नई राह दिखा रहा है। ‘क्रिस्टल फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड’ के संस्थापक और मरीन इंजीनियर श्रेयांश अरजरिया ने एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक ईजाद की है, जो न केवल जल प्रदूषण को खत्म करती है, बल्कि पानी की बर्बादी को भी शून्य स्तर पर लाती है। यह तकनीक ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करते हुए वैश्विक मानकों पर खरी उतरी है।

Indore शून्य जल अपव्यय (Zero Water Waste) और उच्च क्षमता

Indore परंपरागत वाटर प्यूरीफायर में अक्सर बहुत सारा पानी बर्बाद हो जाता है, लेकिन श्रेयांश अरजरिया द्वारा विकसित यह तकनीक ‘जीरो वाटर वेस्ट’ के सिद्धांत पर आधारित है।

  • कम रखरखाव: इस सिस्टम को बहुत ही कम मेंटेनेंस की जरूरत होती है, जिससे यह आर्थिक रूप से भी सुलभ है।
  • कठिन चुनौतियों का समाधान: हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा जैसी जल दुर्घटनाओं के दौरान जहां सामान्य फिल्टर विफल हो जाते हैं, वहां यह तकनीक अत्यधिक प्रदूषित पानी को भी तेजी से पीने योग्य बनाने में सक्षम है। यह आपदा प्रबंधन के समय एक जीवन रक्षक प्रणाली के रूप में कार्य कर सकती है।

IIT इंदौर का मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री द्वारा सराहना

Indore इस तकनीक को वैज्ञानिक रूप से और अधिक सटीक बनाने के लिए IIT इंदौर के ACE Foundation से तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त किया गया है।

  • सरकारी मान्यता: भोपाल में आयोजित MSME सेमिनार के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस नवाचार का अवलोकन कर इसकी सराहना की है।
  • संवैधानिक अधिकार: सह-संस्थापक आराधना अरजरिया के अनुसार, शुद्ध पेयजल हर नागरिक का अधिकार है। यह तकनीक विशेष रूप से उन घनी बस्तियों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी जो वर्तमान में टैंकरों पर निर्भर हैं। इससे रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर महंगे बोतलबंद पानी की निर्भरता भी कम होगी।

आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की व्यापक योजनाएँ

Indore स्वदेशी रूप से डिजाइन और पेटेंट की गई यह तकनीक भविष्य के औद्योगिक और सामाजिक ढांचे के लिए तैयार की गई है।

  • बहुउद्देशीय उपयोग: वर्तमान में इसका उपयोग पेयजल के लिए हो रहा है, लेकिन जल्द ही इसे वॉटर सॉफ्टनर और फैक्ट्रियों के बड़े कॉल सेंटरों के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
  • सामाजिक प्रभाव: यह मॉडल न केवल जल संकट का समाधान है, बल्कि आपदा प्रबंधन, नगर निगमों और ग्राम पंचायतों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक मजबूत विकल्प भी है।

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