BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली – भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइल आज भारतीय रक्षा प्रणाली का एक शक्तिशाली स्तंभ बन चुकी है। अपनी तेज रफ्तार, सटीक निशाना साधने की क्षमता और लंबी दूरी तक वार करने की क्षमता के कारण यह मिसाइल किसी भी दुश्मन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इस मिसाइल का नाम ब्रह्मपुत्र (भारत) और मॉस्कवा (रूस) नदियों के नाम पर रखा गया है, जो दोनों देशों की गहरी दोस्ती का संकेत है।
सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व
ब्रह्मोस मिसाइल सिर्फ एक सैन्य उपकरण नहीं है, यह भारत की सांस्कृतिक जड़ों और तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी परिचायक है। इसका संबंध हिंदू धर्म के पौराणिक ‘ब्रह्मास्त्र’ से जोड़ा जाता है – एक ऐसा शस्त्र जो अचूक और विनाशकारी माना जाता था। ब्रह्मोस उसी अवधारणा का आधुनिक तकनीकी स्वरूप है – विनाशकारी, लेकिन नैतिक और नियंत्रित ताकत।
विनाशकारी क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता
ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे खास बात है इसकी सुपरसोनिक गति, जो मैक 2.8 से लेकर 3.0 तक होती है। यह रफ्तार पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलों से तीन गुना अधिक है, जिससे दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं रहता। इसकी सटीकता इतनी प्रभावशाली है कि यह केवल कुछ मीटर के दायरे में अपने लक्ष्य को ध्वस्त कर सकती है। यही कारण है कि यह मिसाइल सर्जिकल स्ट्राइक और उच्च मूल्य वाले सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
आधुनिक संस्करण: ब्रह्मोस-II
भारत वर्तमान में ब्रह्मोस का अगला संस्करण विकसित कर रहा है – ब्रह्मोस-II, जो हाइपरसोनिक तकनीक पर आधारित होगी। इसकी गति मैक 6 से 7 तक हो सकती है, जो इसे किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से बच निकलने में सक्षम बनाएगी। साथ ही, मिसाइल की रेंज अब बढ़कर 800 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है, जो पहले 290 किमी थी। यह विस्तार भारत के MTCR (Missile Technology Control Regime) में शामिल होने के बाद संभव हुआ।
नई क्षमताएं: स्टील्थ और मैन्युवरैबिलिटी
ब्रह्मोस में अब नई तकनीकों के ज़रिये स्टील्थ क्षमता और तेज़ मैन्युवर करने की क्षमता जोड़ी जा रही है, जिससे यह दुश्मन की निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे सके। हाल ही में बंगाल की खाड़ी में अप्रैल 2025 के दौरान हुए परीक्षण में इसकी 800 किमी की रेंज को सफलतापूर्वक साबित किया गया है। अगला परीक्षण नवंबर 2025 में प्रस्तावित है, जिसमें इसकी सटीकता और स्टील्थ तकनीक को और बेहतर करने की योजना है।
ब्रह्मोस को बनाते हैं ‘गेम-चेंजर’ ये गुण:
- अत्यधिक गति: जिससे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है।
- उच्च सटीकता: जिससे रणनीतिक टारगेट जैसे न्यूक्लियर फैसिलिटीज़, सैन्य ठिकानों पर सीधा वार किया जा सकता है।
- विस्तृत मारक क्षमता: जो दुश्मन की सीमा में गहराई तक असरदार हमला सुनिश्चित करती है।
- परमाणु और पारंपरिक पेलोड क्षमता: जिससे यह एक रणनीतिक हथियार बन जाता है।
राष्ट्र की शक्ति का प्रतीक
ब्रह्मोस न सिर्फ एक उन्नत मिसाइल प्रणाली है, बल्कि यह भारत की तकनीकी दक्षता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग का प्रतीक भी है। यह मिसाइल भारत की रणनीतिक सोच और सांस्कृतिक गर्व का प्रत्यक्ष उदाहरण है। आने वाले वर्षों में इसके नए और हाइपरसोनिक वर्जन भारत की सामरिक स्थिति को और अधिक मज़बूती प्रदान करेंगे।





