BY: Yoganand Shrivastva
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत पर 50% का अब तक का सबसे बड़ा टैरिफ लगा दिया है। अमेरिकी वित्तीय कंपनी जेफरीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत से व्यक्तिगत नाराजगी मानी जा रही है। दरअसल, भारत ने कश्मीर पर ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश को ठुकरा दिया था, जिससे उनका नोबेल शांति पुरस्कार का सपना अधूरा रह गया।
कश्मीर पर भारत का सख्त रुख
ट्रंप कई बार दावा करते रहे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन भारत ने साफ किया कि संघर्षविराम (सीजफायर) पाकिस्तान की मांग पर हुआ था, इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी बाहरी देश की दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।
नाराज हुए ट्रंप
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इस रवैये से ट्रंप की महत्वाकांक्षा को धक्का लगा और वे इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने में नाकाम रहे। इसी गुस्से की झलक भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में दिखाई देती है।
व्यापारिक रिश्तों में खटास
भारत और अमेरिका के बीच यह तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश एशिया में चीन को चुनौती देने के लिए रणनीतिक साझेदारी पर जोर दे रहे थे। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका चाहता था कि भारत अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को विदेशी कंपनियों के लिए खोले। लेकिन भारत ने इन संवेदनशील क्षेत्रों को बचाने का निर्णय लिया, क्योंकि यही सेक्टर देश की 40% आबादी को रोजगार देता है। नतीजा यह हुआ कि मार्च से चल रही व्यापार वार्ताएं ठप पड़ गईं।
भारत का साफ संदेश
भारत ने यह दिखा दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा—चाहे मसला कश्मीर का हो या किसानों का। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस टकराव का असर भारत-अमेरिका रिश्तों और वैश्विक व्यापार पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या दोनों देश इस तनाव को कम करने के लिए कोई रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।