एयर रेड सायरन और रडार सिस्टम कैसे करते हैं काम? जानिए पूरे सुरक्षा ढांचे की विस्तृत जानकारी

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BY: Yoganand Shrivastva

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अब देशभर में सिविल डिफेंस और एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अगर हालात युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो एयर रेड सायरन कब बजेंगे, कौन से सिस्टम काम में लाए जाएंगे और कैसे रडार दुश्मन की हलचल को पकड़ेंगे — यह जानना बेहद जरूरी है। आइए समझते हैं इस पूरे सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से।

1. एयर डिफेंस का पूरा तंत्र कैसे होता है सक्रिय?

भारत की वायु सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भारतीय वायुसेना के पास होती है, जो एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए देश की सीमाओं की निगरानी करती है। यदि कोई संदिग्ध या दुश्मन विमान भारतीय वायुक्षेत्र की ओर बढ़ता है, तो यह सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है।

हर क्षेत्र में तैनात एयर डिफेंस नोड्स को रडार से सूचना मिलती है, और जैसे ही खतरे की पहचान होती है, सिविल प्रशासन को चेतावनी संदेश भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित इलाके में सायरन बजाए जाते हैं, ताकि आम लोग सतर्क हो जाएं और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।

2. सिविल और मिलिट्री विमानों की पहचान कैसे होती है?

हर उड़ान को एक ADC (Air Defence Clearance) और FIC (Flight Information Clearance) नंबर मिलता है। ADC भारतीय वायुसेना जारी करती है जबकि FIC नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाता है।

विमान के उड़ान मार्ग (फ्लाइट प्लान) को ट्रैक किया जाता है और यह जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पास की एयर डिफेंस यूनिट तक स्वतः पहुँचती रहती है। इससे यह स्पष्ट होता रहता है कि कौन-सा विमान कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है।

3. कौन दोस्त, कौन दुश्मन? IFF सिस्टम से होती है पहचान

हर विमान में IFF (Identify Friend or Foe) ट्रांसपोंडर लगा होता है, जो यह बताता है कि विमान मित्र देश का है या शत्रु देश का। यदि कोई विमान इस कोड को ऑन नहीं करता या निर्धारित पैरामीटर में नहीं आता, तो उसे संभावित खतरा मान लिया जाता है।

जब कोई फाइटर जेट दुश्मन के इलाके से उड़ान भरता है, तो आमतौर पर वह IFF को ऑन नहीं करता, ताकि उसकी पहचान न हो पाए। लेकिन भारतीय वायुसेना के पास मौजूद रडार सिस्टम ऐसी हर गतिविधि को पकड़ने में सक्षम हैं।

4. रडार से कैसे पकड़ते हैं खतरा?

देश की हवाई सीमाएं चौबीसों घंटे निगरानी में रहती हैं। इसमें लॉन्ग रेंज, मिड रेंज और शॉर्ट रेंज रडार के साथ-साथ मोबाइल ऑब्जर्वेशन पोस्ट भी लगे होते हैं।

इन सभी की जानकारी एक साथ इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (ICCS) में आती है। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, यह सिस्टम अनुमान लगाता है कि वह विमान किस दिशा में जा सकता है। इसके आधार पर सिविल अथॉरिटी को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है।

5. एयर रेड सायरन और जनता की तैयारी

सिविल प्रशासन जैसे ही अलर्ट प्राप्त करता है, वैसे ही चुनिंदा इलाकों में एयर रेड सायरन बजा दिए जाते हैं। साथ ही स्थानीय प्रशासन जनता को सतर्क करता है कि वे बंकर या सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। कई जगहों पर सिविल डिफेंस ड्रिल्स भी कराई जा रही हैं, ताकि लोग ऐसे हालात में घबराएं नहीं।

6. दुश्मन के विमान को गिराना इतना आसान नहीं

भारत का मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम इतना मजबूत है कि दुश्मन विमान को एक से अधिक परतों को पार करना पड़ता है। इसमें शामिल हैं:

  • लॉन्ग रेंज इंटरसेप्टर मिसाइलें
  • मिड रेंज और शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम
  • मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें
  • क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS)

इन सभी लेयर्स का उद्देश्य दुश्मन के विमान को उसके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही नष्ट कर देना है।

भारत का एयर डिफेंस सिस्टम एक तकनीकी रूप से सशक्त और चौकस नेटवर्क है, जो देश को हर संभावित खतरे से बचाने के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय रहता है। एयर रेड सायरन, रडार और सिविल डिफेंस — ये सभी मिलकर सुनिश्चित करते हैं कि देश की जनता सुरक्षित रहे और किसी भी आपात स्थिति में सतर्कता के साथ कदम उठाए जा सकें

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