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Gwalior EOW Trap Case : ग्वालियर कलेक्ट्रेट में EOW का बड़ा छापा: नामांतरण के एवज में 20 हजार की घूस लेते नायब तहसीलदार का रीडर रंगे हाथ गिरफ्तार

Gwalior EOW Trap Case

Report: Arvind Chouhan

Gwalior EOW Trap Case मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लगातार कार्रवाई के बावजूद भी घूसखोर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ग्वालियर की टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईओडब्ल्यू की टीम ने एक पीड़ित आवेदक की शिकायत पर जाल बिछाकर नायब तहसीलदार के रीडर को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। आरोपी रीडर एक भूखंड के नामांतरण (Mutation) की फाइल को आगे बढ़ाने के नाम पर पिछले एक साल से आवेदक को लगातार चक्कर कटवा रहा था और परेशान कर रहा था।

Gwalior EOW Trap Case कलेक्ट्रेट परिसर में मची सनसनी, डॉ. रमाशंकर सिंह के कक्ष में एक्शन

गुरुवार दोपहर ग्वालियर कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक ईओडब्ल्यू की विशेष टीम वहां दाखिल हुई। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही टीम ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई शुरू कर दी।

  • रंगे हाथ गिरफ्तारी: ईओडब्ल्यू की टीम सीधे नायब तहसीलदार वृत्त गोशपुरा डॉ. रमाशंकर सिंह के शासकीय कक्ष में पहुंची। वहाँ टीम ने जाल बिछाकर आवेदक जितेंद्र पांडे से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20,000 रुपये लेते हुए रीडर अनिल कुटवारिया को रंगे हाथ दबोच लिया। टीम ने तत्काल आरोपी के हाथ धुलवाए, जिससे केमिकल के कारण उनके हाथ गुलाबी हो गए।

Gwalior EOW Trap Case एक साल से टरका रहा था आरोपी, दो बार निरस्त की थी फाइल

पीड़ित आवेदक जितेंद्र पांडे ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती बताते हुए रीडर की प्रताड़ना का खुलासा किया।

  • मामला क्या था: जितेंद्र पांडे ने अपना एक प्लॉट अपनी बुआ को बेचा था, जिसकी रजिस्ट्री उन्होंने 16 जुलाई 2025 को कराई थी। इसके बाद नियमानुसार भूखंड के नामांतरण के लिए फाइल नायब तहसीलदार कार्यालय आई थी।
  • रिश्वत की डिमांड: पीड़ित का आरोप है कि रीडर अनिल कुटवारिया तभी से उन्हें लगातार परेशान कर रहा था और बिना किसी ठोस कारण के दो बार उनकी फाइल को निरस्त (Reject) भी कर चुका था। जब जितेंद्र ने इसका कारण पूछा, तो रीडर ने काम करने के बदले 50,000 रुपये रिश्वत की मांग की। बाद में सौदा 40,000 रुपये में तय हुआ, जिसकी पहली किस्त 20,000 रुपये आज देनी थी।

Gwalior EOW Trap Case 10 जून को हुई थी शिकायत, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

Gwalior EOW Trap Case 10 इस पूरे मामले की प्रशासनिक और वैधानिक कार्रवाई की जानकारी देते हुए ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

  • जांच में सही पाई गई शिकायत: ईओडब्ल्यू डीएसपी शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, आवेदक जितेंद्र पांडे ने 10 जून (बुधवार) को ईओडब्ल्यू एसपी कार्यालय में लिखित आवेदन देकर घूस मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
  • भ्रष्टाचार का प्रमाण: इस संवेदनशील आवेदन की गोपनीय जांच ईओडब्ल्यू के निरीक्षक मदन मोहन मालवीय को सौंपी गई थी। जांच के दौरान जैसे ही रीडर द्वारा रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता प्रमाण (वॉइस रिकॉर्डिंग व अन्य साक्ष्य) मिले, वैसे ही ट्रैप दल का गठन किया गया और गुरुवार को कलेक्ट्रेट में इस सफल छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

आधिकारिक कार्रवाई: ईओडब्ल्यू की टीम ने रिश्वत की राशि जब्त कर आरोपी रीडर अनिल कुटवारिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। कलेक्ट्रेट जैसे मुख्य प्रशासनिक केंद्र के भीतर हुई इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग और कलेक्ट्रेट अमले में हड़कंप का माहौल है।

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