BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल | नेपाल में हाल ही में सोशल मीडिया प्रतिबंध के चलते फैले तनाव और बिगड़े हालात की गूंज अब मध्यप्रदेश तक पहुंच गई है। इस बीच गुना से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य का एक बयान सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि भारत में भी नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसी परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं।
गृह युद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताई
गुना विधायक ने कहा कि देश में हालात बिगड़ने का खतरा बढ़ रहा है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो गृह युद्ध जैसी स्थिति भी बन सकती है। उनका मानना है कि 18 से 30 साल की उम्र के युवाओं को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण (मिलिट्री ट्रेनिंग) दी जानी चाहिए ताकि देश की सुरक्षा को मजबूती मिल सके।
विधायक यह बयान गुना के उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय जूडो और बॉक्सिंग प्रतियोगिता के समापन समारोह के दौरान दे रहे थे। उन्होंने कहा, “खेल और विकास जरूरी हैं, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है देश की सुरक्षा और उसके भविष्य को लेकर गंभीरता।”
बीजेपी ने जताई असहमति, कार्रवाई संभव
गुना विधायक के इस विवादित बयान पर बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बयान पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाता और वरिष्ठ नेतृत्व इस पर जरूर संज्ञान लेगा।
आशीष अग्रवाल ने कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में भारत एक सशक्त और सफल लोकतंत्र के रूप में पूरी दुनिया में उदाहरण पेश कर रहा है। यह विचारधारा न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सराही जा रही है। ऐसे में इस तरह के बयान अस्वीकार्य हैं।”
केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की अपील
पन्नालाल शाक्य ने जिला प्रशासन से भी आग्रह किया कि युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देने का उनका प्रस्ताव केंद्र सरकार तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रशासन को सतर्क रहना चाहिए, वरना हालात बेकाबू हो सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आजकल स्कूटी पर घूम रहे युवाओं को भी सुरक्षा को लेकर जागरूक होना पड़ेगा, क्योंकि भविष्य में खतरे बढ़ सकते हैं।”
इतिहास से सबक लेने की बात
विधायक ने अपने संबोधन में इतिहास के उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा, “नालंदा विश्वविद्यालय में कभी 12 हजार विद्यार्थी और 1200 शिक्षक थे, लेकिन सिर्फ 11 लोगों ने उसे जला दिया। छह महीने तक उसका पुस्तकालय जलता रहा और कोई रोकने वाला नहीं था। इसी तरह सोमनाथ मंदिर को भी आग के हवाले कर दिया गया। हमें इतिहास से सीख लेनी चाहिए।”





