रिपोर्ट: अम्बर कलश
Dhanbad : कोयलांचल की राजनीति में इन दिनों नगर निगम चुनाव को लेकर पारा सातवें आसमान पर है। मेयर पद के लिए यूँ तो 29 चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन असली मुकाबला तीन कद्दावर नेताओं के बीच सिमटता नजर आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों दिग्गजों का नाता किसी न किसी रूप में भाजपा से रहा है, लेकिन आज वे अलग-अलग खेमों से एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।
चंद्रशेखर अग्रवाल: अनुभव और जेएमएम के साथ की नई पारी
Dhanbad पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के समर्थन से चुनावी समर में हैं। 2015 के चुनाव में निर्दलीय लड़कर 93 हजार से अधिक वोट पाने वाले चंद्रशेखर इस बार अपने पिछले कार्यकाल के विकास कार्यों के भरोसे जनता के बीच जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनका अनुभव और शहर की समस्याओं की समझ उन्हें अन्य प्रत्याशियों से आगे रखती है। जेएमएम का साथ मिलने से उनके पक्ष में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं।

संजीव अग्रवाल: भाजपा का नया चेहरा और संगठनात्मक मजबूती
Dhanbad भारतीय जनता पार्टी ने इस बार संजीव अग्रवाल पर दांव खेला है। हालाँकि, संजीव को प्रत्यक्ष चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है, लेकिन भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनके पक्ष में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद और विधायकों की पूरी फौज जुटी हुई है। संजीव अग्रवाल का मुख्य फोकस ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी शहर की जटिल समस्याओं का स्थायी समाधान कर ‘नया धनबाद’ बनाने पर है।
संजीव सिंह: ‘सिंह मेंसन’ की विरासत और मजदूरों का साथ
Dhanbad तीसरे और सबसे चर्चित प्रत्याशी झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह हैं, जो निर्दलीय मैदान में उतरे हैं। सिंह मेंसन की राजनीतिक विरासत और मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ उन्हें एक ताकतवर दावेदार बनाती है। संजीव सिंह ने ‘दो धनबाद’ (विकसित हीरापुर बनाम पिछड़ा झरिया-कतरास) के भेदभाव को खत्म करने का नारा दिया है। उनका कहना है कि गयापुल के उस पार का उपेक्षित इलाका उनकी प्राथमिकता है और वे पूरे निगम क्षेत्र में समान विकास चाहते हैं।
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