Delhi राहत की खबर: भारत को मिली अमेरिकी ‘छूट’, रूस से सस्ता तेल खरीदने का रास्ता साफ; पेट्रोल-डीजल के दाम रहेंगे स्थिर

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Delhi मध्य-पूर्व (मिडिल-ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर के पार पहुँचने के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में फिलहाल बढ़ोतरी नहीं होगी। अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का विशेष लाइसेंस जारी किया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती मिली है।

3 अप्रैल तक मिली विशेष रियायत, सप्लाई रहेगी बरकरार

Delhi अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय तेल कंपनियों को 3 अप्रैल तक के लिए यह अस्थाई छूट दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत उठाए गए इस कदम का उद्देश्य ग्लोबल मार्केट में तेल की आपूर्ति को स्थिर रखना है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है और ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की कोशिशों के बीच यह कदम उठाना अनिवार्य था। हालांकि, यह छूट केवल उन जहाजों के लिए है जो 5 मार्च तक लोड हो चुके थे।

Delhi होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और राजनाथ सिंह की चिंता

Delhi ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) में आवाजाही बाधित हुई है, जहाँ से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। इस स्थिति पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रुकावट का सीधा असर भारत की तेल और गैस सप्लाई पर पड़ता है। राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि जमीन, समुद्र और अब अंतरिक्ष तक बढ़ती यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है, जो भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।

रूसी तेल क्यों है भारत के लिए ‘लाइफलाइन’?

Delhi भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88% आयात करता है, जिसमें रूस की हिस्सेदारी अब फिर से बढ़कर 30% हो गई है। रूस से तेल खरीदना भारत के लिए तीन कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. किफायती दाम: रूस अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों से भारी डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है।
  2. महंगाई पर लगाम: सस्ता कच्चा तेल मिलने से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं।
  3. वैकल्पिक मार्ग: मिडिल-ईस्ट में तनाव के समय रूस एक सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई पार्टनर के रूप में उभरता है। वर्तमान में लगभग 95 लाख बैरल रूसी तेल एशियाई समुद्रों में डिलीवरी के लिए तैयार खड़ा है।

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