संवाददाता: संतोष सराबगी
Dabra (ग्वालियर): ग्वालियर जिले की डबरा तहसील में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला गरमाता जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता महेश प्रजापति द्वारा उजागर किए गए तथ्यों ने राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला वर्ष 2003 में निरस्त किए गए पट्टों की भूमि से जुड़ा है, जिस पर आज भी दबंगों का कब्जा बरकरार है।
Dabra दो दशक पुराने आदेश की अवहेलना
Dabra जानकारी के अनुसार, डबरा तहसील के हरिपुर, चांदपुर और बंन क्षेत्र में वर्ष 2003 में एक सरकारी आदेश के तहत शासकीय भूमि के पट्टे निरस्त किए गए थे। नियमतः यह भूमि तत्काल शासन के अधीन आ जानी चाहिए थी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। लगभग 700 बीघा सरकारी जमीन पर आज भी रसूखदार और दबंग लोग अवैध रूप से काबिज हैं। आरटीआई कार्यकर्ता महेश प्रजापति का कहना है कि वे इस मामले को लेकर हाई कोर्ट तक गए और वहां से ‘स्टे’ (स्थगन आदेश) भी लेकर आए, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
प्रशासन की चुप्पी: राजनीतिक दबाव या मिलीभगत?
Dabra हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई न करना कई संदेह पैदा करता है।
- नेताओं का हस्तक्षेप: स्थानीय चर्चाओं और आरोपों की मानें तो इस बेशकीमती भूमि पर या तो रसूखदार नेताओं का सीधा कब्जा है या फिर उनके संरक्षण में भू-माफिया फल-फूल रहे हैं।
- राजस्व विभाग की विफलता: आखिर क्या वजह है कि जो विभाग छोटे अतिक्रमणों पर बुलडोजर चला देता है, वह 700 बीघा जमीन को मुक्त कराने में असहाय महसूस कर रहा है? सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों पर ऊपर से भारी राजनीतिक दबाव है, जिसके कारण फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
न्याय की गुहार और भविष्य के सवाल
Dabra पीड़ित किसान और आरटीआई कार्यकर्ता महेश प्रजापति ने स्वदेश की टीम को अपने सभी कानूनी दस्तावेज और हाई कोर्ट के आदेश दिखाए। उनका कहना है कि वे न्याय के लिए हर दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं, पर प्रशासन का सहयोग शून्य है।
- अदालत की अवमानना: क्या शासन और प्रशासन हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना अपना अधिकार समझ चुका है?
- जमीन की मुक्ति: क्या कभी यह 700 बीघा सरकारी जमीन भू-माफियाओं के चंगुल से आजाद होकर जनहित में उपयोग हो पाएगी? यह मामला अब केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि कानून के इकबाल और प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा का बन गया है।
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