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भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा पर विवाद: क्या टल गई फांसी? विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली |यमन की जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी की सजा पर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां भारत के प्रमुख धार्मिक नेता ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने दावा किया कि निमिषा की सजा रद्द कर दी गई है, वहीं विदेश मंत्रालय ने इस तरह की खबरों को भ्रामक और आधिकारिक स्थिति के विपरीत बताया है।

क्या फांसी पर लगी रोक?

निमिषा को 16 जुलाई 2025 को गोली मारकर मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन 15 जुलाई को इसे अस्थायी रूप से टाल दिया गया। इसके बाद ग्रैंड मुफ्ती के ऑफिस से यह दावा किया गया कि सजा अब पूरी तरह रद्द हो चुकी है।

हालांकि, विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इस पर संदेह जताया है और कहा कि सजा रद्द होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि यह जानकारी मौजूदा हालात को पूरी तरह परिलक्षित नहीं करती


हत्या के आरोप में दोषी ठहराई गई थीं निमिषा

केरल की निवासी नर्स निमिषा प्रिया पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलाई 2017 में पासपोर्ट वापस पाने के लिए निमिषा ने महदी को नशीला इंजेक्शन दिया था, जिसके ओवरडोज से उसकी मौत हो गई।

इसके बाद निमिषा पर हत्या का मुकदमा चला और यमन की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। उनकी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी खारिज हो चुकी है।


क्या ब्लड मनी से बच सकती हैं निमिषा?

शरिया कानून के तहत हत्या जैसे अपराधों में मृतक के परिवार को यह अधिकार होता है कि वे दोषी को “दीया” यानी ब्लड मनी लेकर क्षमा कर दें। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ द्वारा क्राउडफंडिंग से करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर (8.5 करोड़ रुपए) जुटाए गए।

हालांकि, मृतक महदी के भाई अब्देल फत्तह महदी ने स्पष्ट कर दिया कि उनका परिवार ना तो माफी देगा और ना ही मुआवजा स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल “किसास” यानी बदला चाहिए।

“हमारे भाई की हत्या हुई है, मुआवजा कोई विकल्प नहीं। हम न्याय चाहते हैं।”


ग्रैंड मुफ्ती और यमनी विद्वान की अहम बातचीत

निमिषा को राहत दिलाने के लिए भारत और यमन के धर्मगुरुओं के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई। भारतीय ग्रैंड मुफ्ती अबूबकर मुसलियार और यमन के प्रसिद्ध सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज के बीच 15 जुलाई को संवाद हुआ।इसमें यमन सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और मृतक के परिजन भी शामिल हुए। यह पहला मौका था जब पीड़ित परिवार के किसी सदस्य ने वार्ता के लिए सहमति दी थी।


भारत सरकार की सीमित भूमिका

भारत का यमन में कोई स्थायी दूतावास नहीं है। 2015 के गृहयुद्ध के बाद भारतीय मिशन को जिबूती शिफ्ट कर दिया गया। भारत सरकार अब रियाद स्थित दूतावास के जरिए यमनी अधिकारियों से संपर्क में है। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने कहा था कि वह अपनी सीमाओं तक प्रयास कर चुकी है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा था:

“हम जो कर सकते थे, वह कर चुके हैं। अब कोई विकल्प नहीं बचा है।”


कैसे हुई हत्या?

निमिषा और महदी यमन में एक निजी क्लिनिक के साझेदार थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, महदी ने निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर लिया था और उस पर शारीरिक व मानसिक अत्याचार करता था। एक बार जब वह देश छोड़ना चाहती थीं, तो महदी ने रोका और जाली शादी के दस्तावेज दिखाकर पुलिस से उन्हें गिरफ्तार करवा दिया।

जुलाई 2017 में, कथित तौर पर पासपोर्ट वापस लेने के लिए निमिषा ने महदी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन जब वह होश में रहा, तो ड्रग का ओवरडोज दे दिया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। बाद में शव के टुकड़े कर एक वाटर टैंक में फेंकने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया।


सजा-ए-मौत: यमन में कैसे दी जाती है?

यमन में गोली मारकर मौत की सजा दी जाती है। दोषी को पेट के बल गलीचे पर लिटाया जाता है। डॉक्टर दिल की जगह पर निशान लगाता है और फिर जल्लाद ऑटोमैटिक राइफल से पीठ में गोलियां दागता है।इससे पहले कभी-कभी कोड़े मारने की सजा भी दी जाती है।


क्राउडफंडिंग से जुटाया पैसा, फिर भी नहीं मिली राहत

निमिषा की मां ने अपनी संपत्ति बेचकर और समर्थकों से मदद लेकर ब्लड मनी के लिए लाखों डॉलर जुटाए। कई केरला के उद्योगपतियों और संस्थाओं ने सहायता की।

परंतु महदी परिवार की “सम्मान की रक्षा” की दलील ने इस प्रयास को विफल कर दिया। परिवार ने दोहराया:

“पैसे से हमारे भाई की जान नहीं लौट सकती, और ना ही हमारे दर्द की भरपाई हो सकती है।”


क्या अब भी बच सकती हैं निमिषा?

हालांकि ग्रैंड मुफ्ती के बयान से थोड़ी आशा जगी है, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्टता नहीं आई है। निमिषा की मां, पति और बेटी अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आखिरी पल में कोई राजनीतिक या धार्मिक हस्तक्षेप उन्हें बचा सकेगा।

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