BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश के मामले को लेकर अदालत में बहस हुई। CJI गवई ने इस घटना को “भूला हुआ अध्याय” बताते हुए इसे ज्यादा तवज्जो न देते हुए सुनवाई जारी रखी। हालांकि, उनके कुछ साथी न्यायाधीशों ने इस कृत्य को सर्वोच्च न्यायालय का अपमान करार दिया। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा, “वह CJI हैं, यह मजाक की बात नहीं।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस हमले को अक्षम्य बताते हुए CJI की उदारता की प्रशंसा की। CJI गवई ने सुनवाई के दौरान अपने रुख को दोहराया और अदालत की कार्यवाही को सामान्य रूप से जारी रखा। घटना के समय, आरोपी वकील ने जूता फेंकने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत रोक लिया। आरोपी बाहर जाते समय नारे लगा रहा था कि वह “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा।” इस पूरे मामले ने सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में गहरी चर्चा छेड़ दी है, जहां न्यायपालिका की गरिमा और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं।





