चीन का कर्जजाल: पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी फंसने की राह पर

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
China's debt trap: After Pakistan, Bangladesh is also on the way to getting trapped

चीन अपनी ‘ऋण कूटनीति’ (Debt Diplomacy) के जरिए विभिन्न देशों को आर्थिक रूप से अपने प्रभाव में लेने की नीति पर काम कर रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान है, जो चीन के भारी कर्ज तले दब चुका है और अब उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। लाखों करोड़ के कर्ज पर बढ़ते ब्याज ने पाकिस्तान के लिए संकट खड़ा कर दिया है। अब बांग्लादेश भी उसी राह पर बढ़ता दिख रहा है। मार्च में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे चीन सरकार से विशेष रियायतों की मांग करने वाले हैं।


चीन ने कैसे पाकिस्तान को कर्ज में डुबोया?

पाकिस्तान ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज लिया, खासकर चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत। यह परियोजना पाकिस्तान के लिए वरदान बनने की बजाय आर्थिक बोझ बन गई।

  1. भारी ब्याज दरें और सख्त शर्तें:
    • चीन के कर्ज पर ब्याज दर अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की तुलना में अधिक है।
    • पाकिस्तान को इस कर्ज को चुकाने के लिए अपनी संप्रभुता तक गिरवी रखनी पड़ रही है।
  2. बढ़ता आर्थिक संकट:
    • पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी है।
    • देश को चीनी कर्ज चुकाने के लिए और कर्ज लेना पड़ रहा है, जिससे संकट और गहरा गया है।
  3. संपत्तियों पर चीन का नियंत्रण:
    • पाकिस्तान के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में चीन की हिस्सेदारी बढ़ गई है।
    • ग्वादर पोर्ट और अन्य रणनीतिक परियोजनाएं धीरे-धीरे चीन के नियंत्रण में जा रही हैं।
    • पाकिस्तान पर चीन का कर्ज समय के साथ बढ़ता गया है। एडडाटा के एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2000 से 2021 तक पाकिस्तान पर चीन का संचयी सार्वजनिक ऋण लगभग 67.2 अरब डॉलर था।
    • ब्याज भुगतान के संदर्भ में, वर्ष 2021-22 में पाकिस्तान ने चीन से लिए गए 4.5 अरब डॉलर के ऋण पर लगभग 150 मिलियन डॉलर का ब्याज चुकाया था। इसके पहले, 2019-20 में, 3 अरब डॉलर के ऋण पर 120 मिलियन डॉलर का ब्याज भुगतान किया गया था।
    • हालांकि, ब्याज भुगतान की सटीक राशि ऋण की शर्तों, ब्याज दरों और पुनर्भुगतान अवधि के आधार पर बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, मार्च 2024 में, चीन ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के ऋण की अवधि बढ़ाई, जिसमें पाकिस्तान 7.1% की ब्याज दर का भुगतान कर रहा था।
    • इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पाकिस्तान पर चीन का कर्ज और उस पर ब्याज भुगतान समय के साथ बढ़ता गया है, जिससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

अब बांग्लादेश भी उसी राह पर?

बांग्लादेश भी अब चीन से लिए गए कर्ज के दबाव में आता जा रहा है। वर्तमान में, बांग्लादेश ने चीन से अपने कर्ज की ब्याज दर घटाने और पुनर्भुगतान अवधि को बढ़ाने का अनुरोध किया है।

  1. बांग्लादेश की गिरती अर्थव्यवस्था:
    • विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, जिससे व्यापार और आयात प्रभावित हो रहे हैं।
    • बिजली संकट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि बिजली खरीदने के लिए भी धन की कमी हो रही है।
  2. मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा और उनकी मांगें:
    • बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख, प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस, ने चीन से कर्ज की शर्तों में राहत देने का अनुरोध किया है।
    • उन्होंने चीन से ब्याज दर को 1% तक घटाने और पुनर्भुगतान अवधि को 30 वर्षों तक बढ़ाने की मांग की है।
    • यूनुस ने चीन से आग्रह किया है कि वह अपनी सोलर पैनल फैक्ट्रियों को बांग्लादेश में स्थानांतरित करे, जिससे बांग्लादेश में हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके और निर्यात में विविधता आ सके।

बांग्लादेश पर चीन का बढ़ता कर्ज और ब्याज भुगतान

बांग्लादेश पर चीन का कुल कर्ज लगभग 5.57 खरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो देश के कुल विदेशी ऋण का लगभग 9% है।

ब्याज दरें और भुगतान

बांग्लादेश ने चीन से दो प्रकार के समझौतों के तहत ऋण लिया है:

  • GCL समझौता: इसके तहत लिए गए ऋण पर ब्याज दर 2% है।
  • PBC समझौता: इसके तहत लिए गए ऋण पर ब्याज दर 3% है।

बांग्लादेश सरकार ने चीन से इन ब्याज दरों को 1% तक घटाने और ऋण पुनर्भुगतान अवधि को 20 साल से बढ़ाकर 30 साल करने का अनुरोध किया है।

वार्षिक ब्याज भुगतान

इन ब्याज दरों के आधार पर, बांग्लादेश द्वारा हर वर्ष चुकाए जाने वाले ब्याज की अनुमानित राशि निम्नानुसार हो सकती है:

  • GCL समझौता: 2% ब्याज दर पर, यदि मान लें कि इस समझौते के तहत लिए गए ऋण की राशि X है, तो वार्षिक ब्याज भुगतान होगा: 0.02 × X
  • PBC समझौता: 3% ब्याज दर पर, यदि मान लें कि इस समझौते के तहत लिए गए ऋण की राशि Y है, तो वार्षिक ब्याज भुगतान होगा: 0.03 × Y

कुल मिलाकर, बांग्लादेश का वार्षिक ब्याज भुगतान होगा: (0.02 × X) + (0.03 × Y)

यदि कुल ऋण राशि (5.57 खरब डॉलर) समान रूप से दोनों समझौतों के बीच विभाजित है, तो औसत ब्याज दर 2.5% होगी, और वार्षिक ब्याज भुगतान लगभग 0.025 × 5.57 खरब डॉलर होगा।

यह स्पष्ट है कि चीन से लिए गए कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, और यदि समय रहते नीतिगत सुधार नहीं किए गए, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।


चीन की ऋण कूटनीति: खतरा या अवसर?

  • चीन अपनी कर्ज नीति के जरिए देशों को आर्थिक रूप से कमजोर कर, अपने प्रभाव में लेने की रणनीति पर काम करता है।
  • पाकिस्तान इसका उदाहरण है, और अब बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर बढ़ रहा है।
  • यदि बांग्लादेश ने जल्द ही आर्थिक सुधारों पर ध्यान नहीं दिया, तो वह भी पाकिस्तान की तरह कर्ज के बोझ तले दब सकता है।

चीन की ‘ऋण कूटनीति’ केवल आर्थिक सहायता का जरिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक नियंत्रण की नीति भी है। पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा शिकार बन चुका है और अब बांग्लादेश भी उसी राह पर बढ़ता दिख रहा है। यदि इन देशों ने अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में वे अपनी आर्थिक संप्रभुता तक खो सकते हैं।

ये भी पढ़िए: “बस PoK का इंतजार है…” – विदेश मंत्री जयशंकर का करारा जवाब

Crime Control Drive: रायपुर में पुलिस का विशेष अभियान तेज, 22 संदिग्धों पर की गई वैधानिक कार्रवाई

Crime Control Drive: तेलीबांधा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई, संदिग्धों की

Ebola Surveillance: इबोला प्रभावित देशों से लौटे तीन लोगों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर, दुर्ग में अलर्ट जारी

Ebola Surveillance: कांगो, इथियोपिया और युगांडा से लौटे यात्रियों की निगरानी, सैंपल

UPSC Aspirant Support: यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा की मदद को आगे आए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी

UPSC Aspirant Support: कलेक्टर से मुलाकात में छात्रा महिमा प्रजापति की भावुक

Road Projects :MP में सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी,केंद्र से दो सड़क परियोजनाओं को मंजूरी

Road Projects : डबल इंजन की सरकार, विकास की नई रफ्तार,बैतूल-खंडवा-खरगोन-बड़वानी को

Palari Municipal Election में कांग्रेस का दबदबा, अध्यक्ष पद यानेश साहू ने जीता

Palari Municipal Election: अध्यक्ष पद में रोमांचक मुकाबला, यानेश साहू ने 506