अंतरिक्ष विज्ञान में चीन ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। हाल ही में उसने लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट का सफल परीक्षण पूरा किया। यह रॉकेट 2030 तक इंसानों को चांद पर भेजने की चीन की महत्वाकांक्षी योजना का अहम हिस्सा है।
हैनान द्वीप स्थित स्पेसपोर्ट पर रॉकेट के पहले चरण का परीक्षण किया गया। इस दौरान सात YF-100K इंजनों को 30 सेकंड तक चलाया गया, जिससे करीब 900 टन का जबरदस्त थ्रस्ट उत्पन्न हुआ। खास बात यह रही कि सभी इंजन तालमेल में चले, जो रॉकेट की स्थिरता और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
तीन गुना ज्यादा ताकतवर रॉकेट
- चीन की मानव अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, यह टेस्ट इस बात की पुष्टि करता है कि इंजन सामान्य और हाई-पावर दोनों स्थितियों में काम करने में सक्षम हैं।
- लॉन्ग मार्च-10, चीन के मौजूदा सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्ग मार्च-5 से तीन गुना ज्यादा ताकतवर है।
- पूरी तरह असेंबल होने पर यह रॉकेट 92 मीटर लंबा होगा और इसमें एक साथ 21 इंजन चलेंगे।
- सात इंजन इसके कोर सेक्शन में और सात-सात दोनों बूस्टर पर लगाए जाएंगे।
2017 से शुरू हुआ विकास
इस रॉकेट का निर्माण कार्य 2017 में शुरू किया गया था।
- 2024 में इसके तीन इंजनों का कई मिनट तक सफल परीक्षण किया गया था।
- इस बार, इतना बड़ा थ्रस्ट पैदा करने के लिए सामान्य टेस्ट स्टैंड पर्याप्त नहीं था, इसलिए इसे असली लॉन्च पैड पर टेस्ट किया गया।
- इंजीनियरों ने हीट-रेजिस्टेंट कोटिंग, फॉल्ट डिटेक्शन सिस्टम और मल्टी-इंजन सिस्टम की विश्वसनीयता की भी जांच की।
27 टन सामान ले जाने की क्षमता
लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट 27 टन तक का पेलोड चांद की ओर भेज सकता है।
- मिशन के लिए दो लॉन्च की योजना बनाई गई है।
- पहला यान मेन्ग्झोउ (Mengzhou) होगा, जो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा।
- दूसरा यान लान्ये (Lanyue) होगा, जो लैंडर को चांद की सतह पर उतारेगा।
- दोनों यान चांद की कक्षा में मिलेंगे और अंतरिक्ष यात्री लैंडर में बैठकर चांद की सतह पर उतरेंगे।
2035 तक चांद पर बेस बनाने की योजना
2030 में पहली मानव लैंडिंग के बाद चीन और उसके सहयोगी देश (जैसे रूस) मिलकर 2035 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंटरनेशनल लूनार रिसर्च स्टेशन (ILRS) बनाने की योजना पर काम करेंगे।
यह कदम न केवल चीन के अंतरिक्ष अभियान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर चांद पर मानव उपस्थिति के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।





