Report: Rakesh Chandwanshi
Chhindwara : आदिवासी जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले अतरिया संकुल की प्राथमिक शाला निर्भयपुर में वर्षों से जड़ जमाए बैठी मनमानी और लापरवाही पर अब प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। स्वदेश न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से दिखाई गई रिपोर्ट के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। 13 वर्षों से शिक्षा के मंदिर को अपनी जागीर समझने वाले चेहरे अब जांच के घेरे में हैं।

जांच टीम गठित: कुंडली खंगालने में जुटा प्रशासन
Chhindwara शिक्षिका माया परतेती और नितिन के ‘अघोषित साम्राज्य’ की खबरें जैसे ही सुर्खियों में आईं, प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच टीम का गठन कर दिया है। टीम स्कूल में व्याप्त अनियमितताओं, लंबे समय से चली आ रही लापरवाही और विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो दोषी शिक्षकों के खिलाफ बड़ी विभागीय कार्रवाई की फाइल तैयार हो चुकी है और जल्द ही इस ‘साम्राज्य’ पर गाज गिरना तय है।

संकुल प्राचार्य की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
Chhindwara कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच जनता और अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या संकुल प्राचार्य आशुतोष त्रिपाठी की भूमिका की भी जांच होगी? क्षेत्र में चर्चा आम है कि बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी के संरक्षण के, 13 साल तक इस तरह की मनमानी संभव नहीं थी। अभिभावक पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन केवल निचले स्तर के शिक्षकों पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी करेगा या उन ‘संरक्षकों’ को भी घेरे में लेगा जिन्होंने वर्षों तक इन गलतियों पर आँखें मूंद रखी थीं?
रक्षक या भक्षक: क्या रफा-दफा हो जाएगा मामला?
Chhindwara अब सबकी निगाहें प्रशासन की निष्पक्षता पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या उन अधिकारियों को ‘क्लीन चिट’ मिल जाएगी जो व्यवस्था के रक्षक थे लेकिन मौन रहकर भ्रष्टाचार और लापरवाही के भागीदार बने रहे? क्या संकुल प्राचार्य की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी या रसूख के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक जड़ (संरक्षण देने वाले अधिकारी) पर प्रहार नहीं होगा, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
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