रायपुर, 3 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ सरकार ने माओवादी समूहों के साथ शांति वार्ता करने की इच्छा जताई है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने यह बयान उस पत्र के जवाब में दिया जिसमें माओवादियों ने युद्धविराम की पेशकश की थी। माओवादियों ने शर्त रखी है कि सरकार बस्तर इलाके में सुरक्षा अभियानों को रोके।
माओवादियों का प्रस्ताव
सीपीआई (माओवादी) ने हिंदी में लिखे पत्र में दावा किया कि ऑपरेशन ‘कागर’ के दौरान उनके कई सदस्य मारे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने आम लोगों को परेशान किया और गिरफ्तार किया। पत्र में कहा गया, “हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को भी हिंसा रोकनी होगी।”

सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पत्र की जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते। यही वजह है कि हमने सरेंडर करने वालों के लिए पुनर्वास योजना शुरू की है।”
शर्मा ने माओवादियों के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने संविधान का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “क्या माओवादी संविधान में विश्वास रखते हैं? हम तिरंगा फहराकर संविधान लागू कर रहे हैं, न कि किसी व्यक्ति के नियम।”
बढ़ते सुरक्षा अभियान
दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद से राज्य में माओवाद विरोधी कार्रवाई तेज हुई है। इस साल अब तक 135 माओवादी मारे जा चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
आगे की राह
शर्मा ने कहा कि सरकार वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन माओवादियों को भी हिंसा छोड़नी होगी। उन्होंने कहा, “अगर वे सच में बात करना चाहते हैं, तो किसी भी माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।”
इस मामले में अब माओवादियों की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इससे बस्तर में शांति की संभावना बढ़ेगी।