महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा, स्वयं सहायता समूहों को क्रेडिट सहायता

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Promotion of women empowerment, credit support to self help groups

रांची। झारखंड सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बैंकों के साथ क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। वर्ष 2019 से अब तक 53,293 से अधिक नए समूह बनाए गए हैं और क्रेडिट लिंकेज की सहायता राशि 14,204 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो 2019 से पहले मात्र 545.30 करोड़ रुपये थी। अब तक कुल 2.91 लाख समूह गठित किए जा चुके हैं।

ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा लाभ

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत 2.67 लाख सखी मंडलों को बैंक क्रेडिट लिंकेज से जोड़ा गया है। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। सरल शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराकर महिलाओं को अपनी आजीविका के विभिन्न साधनों को विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।

प्रेरणादायक कहानियां: कैसे बदली महिलाओं की जिंदगी

बोकारो की प्रेमलता देवी: बोकारो के चंद्रपुरा प्रखंड की प्रेमलता देवी, जीवन ज्योति आजीविका सखी मंडल से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। पति के असमय निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। समूह से मिले 50,000 रुपये के क्रेडिट लिंकेज के तहत उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और काम शुरू किया। धीरे-धीरे आमदनी बढ़ी और उन्होंने सिलाई केंद्र खोलने के लिए ग्राम संगठन से 30,000 रुपये का ऋण लिया। आज वह हर महीने लगभग 10,000 रुपये कमा रही हैं।

जामताड़ा की किरण झा: नाला प्रखंड की किरण झा, राधा कृष्ण आजीविका सखी मंडल से जुड़कर सफल उद्यमी बनी हैं। उन्होंने पहले आरसेटी (RSETI) से आचार और पापड़ बनाने का प्रशिक्षण लिया और फिर 50,000 रुपये के क्रेडिट लिंकेज के जरिए अपना व्यवसाय शुरू किया। आज वह सालाना 1.2 लाख रुपये कमा रही हैं और अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। उनके बेटे ने डीडीयूजीकेवाई से प्रशिक्षण लेकर सालाना 3.6 लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे उनका परिवार खुशहाल हो गया।

आजीविका मिशन से जुड़ रहे लाखों परिवार

झारखंड में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 32 लाख परिवारों को आजीविका के मजबूत साधनों से जोड़ा गया है। कृषि, पशुपालन, वनोपज, अंडा उत्पादन और जैविक खेती के जरिए इन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

वनोत्पाद और तकनीक से मिल रही नई दिशा

राज्य संपोषित झारखंड माइक्रोड्रिप इरिगेशन परियोजना के तहत 31,861 किसानों को टपक सिंचाई तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे उन्नत खेती को बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ ही बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी, पशु सखी, कृषि सखी, वनोपज मित्र, आजीविका रेशम मित्र जैसी 85,000 सामुदायिक कैडर महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें आधुनिक संचार तकनीक से लैस किया गया है।

झारखंड सरकार की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है, जिससे न केवल महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।

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