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वक्फ बिल पर संसद में तीखी बहस, इस बीजेपी सांसद ने खोली तुष्टीकरण की कलई

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Fierce debate in Parliament on Wakf Bill, this BJP MP exposed appeasement

BY: Vijay Nandan

लोकसभा में पारित होने के बाद, आज राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने दोपहर एक बजे इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने विपक्ष पर वक्फ बिल को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और इस विषय पर कड़ा रुख अपनाया।

बीजेपी सांसद का कड़ा बयान

डॉ. अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज में समय-समय पर सुधार होते रहे हैं, लेकिन मुस्लिम समाज में अब तक कोई ठोस सुधार की पहल नहीं की गई। उन्होंने वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली की तुलना भूमाफियाओं से करते हुए कहा कि जिस जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया, वह उसकी हो गई।

उन्होंने कहा, “हमने अपने समाज में कई बुराइयों को दूर करने के लिए कानून बनाए। सती प्रथा को समाप्त करने के लिए अधिनियम लाए, बाल विवाह निषेध कानून बनाया। लेकिन पिछले 75 वर्षों में मुस्लिम समाज में सुधार की कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिससे गरीब और पिछड़े मुसलमानों को नुकसान हुआ है।”

ओवैसी पर निशाना

बीजेपी सांसद ने बहस के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ओवैसी ने उनका नाम ‘मौलाना राधा मोहन अग्रवाल’ रख दिया है, जो उनके लिए किसी जीत से कम नहीं है।

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से कहा था कि किसी भी कार्य को करते समय धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। विकास की धारा समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचनी चाहिए।”

विपक्ष का पलटवार

इस चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने वक्फ बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करने का एक प्रयास है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया और इसे ‘अन्यायपूर्ण’ करार दिया।

विधेयक के संभावित प्रभाव

इस विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार की निगरानी मजबूत होगी। सरकार का कहना है कि यह कानून भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और गरीब मुसलमानों को उनका हक दिलाने में मदद करेगा। हालांकि, विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।

वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में बहस ने राजनीतिक हलकों में गर्मी बढ़ा दी है। जहां सत्तापक्ष इसे सुधारात्मक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बता रहा है। अब देखना होगा कि इस विधेयक को लेकर आगे क्या राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम सामने आते हैं।

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