by: digital desk
Kharge Land Controversy : कांग्रेस पार्टी का दौहरा चरित्र एक बार फिर सामने आ गया है। एक तरफ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक में अपने मंत्री बेटे के साथ मिलकर जमीन घोटाला कर रहे हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भाजपा से सवाल पूछ रहे हैं।
Kharge Land Controversy : कांग्रेस का दोगलापन देखिए: भाजपा पर हमला और अपने अध्यक्ष से सवाल तक नहीं…
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का मामला तो आपको भी पता होगा। किस प्रकार आंकड़ों को यहां वहां करके, मुख्यमंत्री के इन्वेस्टमेंट को, उनके चचेरे भाइयों के रियल एस्टेट बिजनेस से कनेक्ट करके हल्ला करने की कोशिश की जा रही है। जो जमीन उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले खरीद ली थी, कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी है। जिस कंपनी को 2017 में छोड़ चुके हैं, आज भी उस कंपनी का डायरेक्टर बताया जा रहा है।
एक व्यक्ति जो युवावस्था से जमीनों में इन्वेस्टमेंट कर रहा है, क्योंकि राजनीति के कारण बिजनेस नहीं कर सकता, उसके पुराने इन्वेस्टमेंट पर सवाल उठाए जा रहे हैं जबकि कांग्रेस की अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुलेआम जमीन घोटाला कर रहे हैं। सरकारी जमीन अपने प्राइवेट ट्रस्ट के नाम करवा रहे हैं। उनसे कोई सवाल नहीं कर रहा।
Kharge Land Controversy : 1000 करोड़ की सरकारी जमीन प्राइवेट ट्रस्ट के नाम आवंटित करवा ली
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर बेंगलुरु में 5 एकड़ जमीन मल्लिकार्जुन खड़गे के प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट (Siddhartha Vihar Trust) को आवंटित की है। (कृपया नोट कीजिए, सरकार ने आवंटित की, प्राइवेट ट्रस्ट द्वारा सरकार से खरीदी नहीं।) प्रदीप भंडारी के अनुसार, इस जमीन की बाजार कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपए है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यह एक प्राइवेट लिमिटेड ट्रस्ट है और कर्नाटक सरकार ने दो प्रमुख नियमों का उल्लंघन (violation of two rules) करते हुए यह आवंटन किया है। भाजपा ने यह भी पूछा कि इस ट्रस्ट ने अब तक लोकहित (public interest) में ऐसा क्या काम किया है जिसके लिए उसे इतनी महंगी जमीन दी गई?
Kharge Land Controversy : 90 एकड़ सरकारी जमीन रिसर्च के नाम पर ले ली
भ्रष्टाचार के आरोपों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं हुई। प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि खड़गे परिवार के इसी प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को गुलबर्ग में 90 एकड़ जमीन पानी के रिसर्च (water research) के लिए दी गई है। भाजपा का दावा है कि Mallikarjun Kharge and Priyank Kharge ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर इन जमीनों पर कब्जा जमाया है। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है क्योंकि भाजपा ने इसे एक सुनियोजित तरीके से किया गया Act of Corruption करार दिया है।
Kharge Land Controversy : दलितों का स्वयंभू मसीहा, कर्नाटक में मालामाल हो गया
प्रदीप भंडारी ने खड़गे पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो स्वयं को “दलितों का मसीहा” बताते हैं, वे असल में अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे प्रियंक खड़गे ने Abuse of power and position के जरिए इन बेशकीमती जमीनों को अपने नाम करवाया है। भाजपा के अनुसार, कर्नाटक में खड़गे परिवार द्वारा जगह-जगह जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। पार्टी ने इस पूरे land allotment scam की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

