क्या विज्ञान ने खोज लिया अमरत्व का राज़? जर्मन कंपनी कर रही है बड़ा दावा

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क्या विज्ञान ने खोज लिया अमरत्व का राज़? जर्मन कंपनी कर रही है बड़ा दावा

विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है और अब एक ऐसी तकनीक चर्चा में है, जो इंसान को मरने के बाद भी जीवित करने की उम्मीद जगाती है। जर्मनी की एक स्टार्टअप कंपनी Tomorrow Bio “क्रायोप्रिजर्वेशन” नामक सेवा दे रही है, जिसमें इंसान की मौत के बाद उसके शरीर को विशेष तकनीक से फ्रीज किया जाता है। कंपनी का दावा है कि भविष्य में चिकित्सा विज्ञान की प्रगति से ऐसे लोगों को दोबारा जीवित किया जा सकता है।


क्या है क्रायोप्रिजर्वेशन?

क्रायोप्रिजर्वेशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें

  • शरीर या अंग को अत्यधिक निम्न तापमान पर फ्रीज किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य कोशिकाओं और ऊतकों को सड़न व क्षति से बचाना होता है।
  • शरीर को -196 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लिक्विड नाइट्रोजन में रखा जाता है।

यह तकनीक फिलहाल केवल भविष्य की संभावनाओं पर आधारित है और इसे लेकर वैज्ञानिक जगत में बहस जारी है।


Tomorrow Bio की विशेष सेवा

  • स्थान: बर्लिन, जर्मनी
  • लागत: लगभग 1.74 करोड़ रुपये (200,000 डॉलर)
  • प्रक्रिया: मौत के तुरंत बाद कंपनी की 24/7 इमरजेंसी टीम शरीर को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू करती है।
  • उद्देश्य: भविष्य में चिकित्सा विज्ञान की प्रगति होने पर संरक्षित लोगों को पुनर्जीवित करना।

अब तक 650 से अधिक लोग इस सेवा के लिए साइन अप कर चुके हैं। इसके अलावा कंपनी ने कुछ पालतू जानवरों का भी क्रायोप्रिजर्वेशन किया है।


कितना सफल है यह प्रयोग?

  • रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक किसी इंसान को क्रायोप्रिजर्वेशन के बाद दोबारा जीवित नहीं किया जा सका है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि जटिल मस्तिष्क संरचना को सुरक्षित रखना बेहद कठिन है।
  • किंग्स कॉलेज लंदन के न्यूरोसाइंस प्रोफेसर क्लाइव कोएन के अनुसार, फिलहाल इंसानों को पुनर्जीवित करने का कोई सबूत मौजूद नहीं है।
  • वहीं, Tomorrow Bio के को-फाउंडर एमिल केंडजिओरा का कहना है कि शरीर को सही तापमान पर संरक्षित करना जरूरी है, ताकि कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

  • समर्थन में: भविष्य में तकनीक इतनी उन्नत हो सकती है कि यह संभव हो जाए।
  • विरोध में: वर्तमान में इसे “अवैज्ञानिक” और “कल्पनात्मक” कहा जा रहा है।

क्रायोप्रिजर्वेशन एक रोमांचक लेकिन विवादित तकनीक है। जहां कुछ लोग इसे विज्ञान का अगला चमत्कार मान रहे हैं, वहीं वैज्ञानिक इसे अभी भी अव्यावहारिक बताते हैं। फिलहाल, यह भविष्य की आशाओं और संभावनाओं पर टिकी एक प्रयोगात्मक सेवा है।

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