दिल्ली विधानसभा में आज पेश होगी CAG रिपोर्ट, हो सकते हैं बड़े खुलासे

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दिल्ली: विधानसभा में आज नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के कार्यकाल के दौरान शराब नीति और सीएम आवास नवीनीकरण से जुड़े गंभीर मामलों पर खुलासा होने की संभावना है। ऐसे में विधानसभा में आज जोरदार हंगामे के आसार हैं।

शीशमहल नवीनीकरण पर उठेंगे सवाल

CAG रिपोर्ट में दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास “6 फ्लैग स्टाफ रोड” के नवीनीकरण में अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत कैंप ऑफिस और स्टाफ ब्लॉक को भी शामिल किया गया, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत 7.61 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन अप्रैल 2022 तक यह खर्च बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

शराब नीति घोटाले का पर्दाफाश

CAG रिपोर्ट में दिल्ली सरकार की पूर्व शराब नीति में भी कई अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में सामने आए 10 प्रमुख बिंदु:

  1. शराब नीति लागू करने से पहले विशेषज्ञों से सलाह ली गई थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया गया।
  2. घाटे में चल रही कंपनियों और विवादों में घिरी फर्मों को भी लाइसेंस दिए गए।
  3. कई बड़े फैसले कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना लिए गए।
  4. नीति की खामियों की वजह से सरकार को 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  5. इस नीति को विधानसभा में पेश तक नहीं किया गया।
  6. कोविड-19 का हवाला देकर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई।
  7. जिन लाइसेंसों को रद्द किया गया था, उन्हें दोबारा टेंडर प्रक्रिया से आवंटित नहीं किया गया, जिससे 890 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  8. ज़ोनल लाइसेंस धारकों को छूट देने से सरकार को 941 करोड़ रुपये का और घाटा हुआ।
  9. सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि की सही वसूली नहीं होने के कारण 27 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  10. शराब की दुकानें पूरे शहर में समान रूप से वितरित नहीं की गईं।

भाजपा सरकार का रुख

दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि उनकी सरकार CAG रिपोर्ट को विधानसभा के पहले सत्र में ही पेश करेगी। भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं होने दिया था और जानबूझकर इसकी ऑडिट प्रक्रिया में देरी की गई। अब सत्ता बदलने के साथ ही इस रिपोर्ट के खुलासे से केजरीवाल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं।

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