BY: Yoganand Shrivastva
लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने विदेशी अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नई नीति की घोषणा की है। इसके तहत अब ब्रिटेन में अपराध करने वाले प्रवासियों को तुरंत उनके देश भेज दिया जाएगा और उन्हें वहीं से अपील करने का मौका मिलेगा। पहले उन्हें देश में रहते हुए अपील का समय मिलता था।
नई सूची में भारत, पाकिस्तान को जगह नहीं
ब्रिटेन सरकार ने जिन देशों को इस नीति के दायरे में रखा है, उनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंडोनेशिया और बुल्गारिया जैसे बड़े देश शामिल हैं। पहले से सूची में मौजूद नाइजीरिया, अल्बानिया, मॉरीशस, फिनलैंड, तंजानिया, एस्टोनिया, बेलीज और कोसोवो के साथ अब गुयाना, केन्या और लातविया को भी जोड़ा गया है।
हालांकि, पाकिस्तान को इस सूची से बाहर रखा गया है, जबकि हाल ही में वहां के नागरिक ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग’ मामले में गिरफ्तार हुए थे।
सरकार का तर्क और उद्देश्य
गृह मंत्री यवेट कूपर के मुताबिक, इस कदम का मकसद है कि अपराधी ब्रिटेन में अपील के बहाने वर्षों तक न ठहरें। सरकार का दावा है कि यह नीति जेलों में भीड़ घटाने, करदाताओं के पैसों की बचत करने और कानून का डर बनाए रखने में मदद करेगी। वर्तमान में ब्रिटेन की जेलें 100% क्षमता पर चल रही हैं, जहां 10,772 विदेशी कैदी हैं। इनमें 320 भारतीय और 317 पाकिस्तानी कैदी शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, एक कैदी पर सालाना करीब 50 लाख रुपये का खर्च आता है, जो टैक्सपेयर्स पर सीधा बोझ है।
विपक्ष का आरोप और राजनीतिक विवाद
विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी के नेता क्रिस फिल्प ने आरोप लगाया कि सरकार ने पाकिस्तान को सूची से बाहर रखकर राजनीतिक दबाव में ‘यू-टर्न’ लिया है। उनका कहना है कि सभी विदेशी अपराधियों पर एक जैसी कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार का कहना है कि सूची में सिर्फ वे देश शामिल हैं जिनसे ब्रिटेन के पास कानूनी और प्रशासनिक प्रत्यर्पण समझौते मौजूद हैं।
विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान को बाहर रखकर ब्रिटेन वहां के साथ सुरक्षा और आतंकवाद निरोधी सहयोग के लिए बातचीत में बढ़त हासिल करना चाहता है। वहीं भारत के मामले में, वीज़ा उल्लंघन, धोखाधड़ी और इमिग्रेशन कानून तोड़ने के मामलों में वृद्धि को देखते हुए यह सख्ती की गई है।