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BRICS 2026 : BRICS में फिर मिलेंगे मोदी-जिनपिंग, जानिए, दोनों नेताओं के गांवों का ऐतिहासिक रिश्ता

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BRICS 2026 : नई दिल्ली, भारत और चीन के रिश्ते सिर्फ सीमा, व्यापार और रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धागा भी है, जो करीब 1400 साल पीछे जाता है। यह धागा जुड़ता है चीन के महान यात्री और बौद्ध विद्वान ह्वेनसांग (Xuanzang) से। दिलचस्प बात यह है कि आज इसी इतिहास का संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संबंधों की एक खास कड़ी के रूप में भी सामने आता है।

अब जब शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं, तो करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा एक बार फिर चर्चा में है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में तनाव के दौर के बाद धीरे-धीरे संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।

BRICS 2026 : मोदी ने खुद बताया था ह्वेनसांग वाला कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पॉडकास्ट बातचीत में बताया था कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें फोन कर बधाई दी थी। बातचीत के दौरान जिनपिंग ने गुजरात आने और मोदी के गांव वडनगर जाने की इच्छा जताई थी। जब मोदी ने इसका कारण पूछा तो जिनपिंग ने ह्वेनसांग के जरिए दोनों के बीच एक विशेष ऐतिहासिक जुड़ाव का उल्लेख किया।

यह विवरण उस ऐतिहासिक यात्रा की ओर इशारा करता है, जब 7वीं शताब्दी में ह्वेनसांग भारत आए थे और उन्होंने यहां लंबे समय तक रहकर बौद्ध शिक्षा, भारतीय समाज और तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था का अध्ययन किया था। उपलब्ध स्रोतों में वडनगर का उल्लेख ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत में आनंदपुर के नाम से मिलता है।

BRICS 2026

भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड में भी कहा गया है कि ह्वेनसांग करीब 641 ईस्वी में वडनगर आए थे और उन्होंने इसे आनंदपुर के रूप में दर्ज किया था। उस समय वडनगर एक महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र था।

BRICS 2026 : ह्वेनसांग की यात्रा ने भारत-चीन को कैसे जोड़ा?

ह्वेनसांग केवल यात्री नहीं थे। वे बौद्ध दार्शनिक, विद्वान और अनुवादक थे। उनका भारत आने का प्रमुख उद्देश्य बौद्ध धर्म और उसके मूल ग्रंथों का अध्ययन करना था। वे नालंदा पहुंचे, जहां उस दौर में बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र मौजूद था। उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा की और यहां के धर्म, शिक्षा, समाज तथा राजनीतिक व्यवस्था के बारे में विस्तृत विवरण लिखा।

उनके यात्रा-वृत्तांत की खास अहमियत इसलिए भी है क्योंकि वह हर्षवर्धन के दौर के भारत को समझने के प्रमुख ऐतिहासिक स्रोतों में माना जाता है। वडनगर के बारे में उनके विवरण में बौद्ध मठों और भिक्षुओं की मौजूदगी का उल्लेख मिलता है।

भारत में लंबे समय तक रहने के बाद ह्वेनसांग चीन लौटे। वहां उन्होंने भारत से लाए बौद्ध ग्रंथों का अनुवाद किया। चीन का शीआन भी उनकी विरासत से गहराई से जुड़ा है। यही वह शहर है, जहां 2015 में प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विशेष स्वागत किया था।

BRICS 2026 : 2014 में गुजरात, 2015 में शीआन, इतिहास बना कूटनीति का हिस्सा

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर 2014 की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव थी। भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 17 से 19 सितंबर 2014 तक भारत आए थे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत हुई थी।

इसके अगले साल मई 2015 में प्रधानमंत्री मोदी चीन पहुंचे। इस यात्रा में एक खास बात यह थी कि मोदी ने सबसे पहले शीआन का दौरा किया। वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने बातचीत के साथ-साथ बौद्ध विरासत से जुड़े स्थलों का दौरा किया।

मोदी ने शीआन के बिग वाइल्ड गूज पगोडा का भी दौरा किया और वहां बोधि वृक्ष का पौधा भेंट किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड में इस यात्रा का विस्तृत उल्लेख है।

पीएम मोदी ने अपनी चीन यात्रा से पहले स्वयं कहा था कि शी जिनपिंग द्वारा उन्हें अपने गृह प्रांत में स्थित शीआन आने का निमंत्रण मिलना विशेष बात है, क्योंकि यह शहर ह्वेनसांग से गहराई से जुड़ा हुआ है।

BRICS 2026 : 2016, 2019 और अब 2026

इसके बाद शी जिनपिंग भारत की यात्राओं के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में संवाद का सिलसिला आगे बढ़ाते रहे। 2016 में वह गोवा में BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। 2019 में उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन किया। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार यह बैठक 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई थी।

अब सितंबर 2026 में शी जिनपिंग फिर भारत आ रहे हैं। इस बार मंच BRICS है, लेकिन इसके समानांतर मोदी और शी की संभावित द्विपक्षीय बैठक का महत्व कहीं बड़ा है। यह भारत में दोनों नेताओं की सात साल बाद होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकात होगी।

BRICS 2026 : क्यों अहम है जिनपिंग का यह दौरा?

इस यात्रा का महत्व केवल BRICS की बैठक तक सीमित नहीं है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, बाजार तक पहुंच, निवेश, वीजा और रणनीतिक विश्वास जैसे कई मुद्दे अब भी मौजूद हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

इसीलिए जिनपिंग का भारत आना दोनों देशों के बीच संवाद की वापसी का संकेत माना जा रहा है। BRICS का बहुपक्षीय मंच दोनों नेताओं को वैश्विक मुद्दों के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर बातचीत का अवसर भी देगा। हालिया रिपोर्टों के अनुसार संभावित बातचीत में सीमा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संवाद जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

BRICS 2026 : ह्वेनसांग से शुरू हुई कहानी, अब नई कूटनीति की परीक्षा

करीब 1400 साल पहले ह्वेनसांग भारत आए थे और उन्होंने भारत तथा चीन के बीच ज्ञान और बौद्ध संस्कृति का सेतु बनाया। सदियों बाद वडनगर और शीआन का यही ऐतिहासिक संदर्भ मोदी और शी जिनपिंग की कूटनीतिक यात्राओं में दिखाई दिया।

लेकिन 2026 की वास्तविक परीक्षा इतिहास से आगे की है। ह्वेनसांग दोनों सभ्यताओं को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी हो सकते हैं, मगर आज भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने के लिए सीमा विवाद, व्यापार और रणनीतिक विश्वास जैसे कठिन सवालों के जवाब तलाशने होंगे। ऐसे में जिनपिंग की भारत यात्रा यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि दोनों देश पुराने तनाव से आगे बढ़कर सहयोग का नया अध्याय लिख पाते हैं या नहीं। लेकिन यहां एक सवाल ये भी है कि चीन के साथ पिछले अनुभव को देखते हुए भारत को फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाने की जरूरत भी है।

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