Report: Sanjeev kumar
Bokaro बोकारो स्टील सिटी के सेक्टर 12 में उस वक्त तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब ‘आवास बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले पूर्व कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अपनी छत बचाने की गुहार लगाते हुए इन रिटायर्ड कर्मचारियों ने एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल की। विशेष बात यह है कि इस आंदोलन का नेतृत्व 70 से 80 वर्ष की आयु के बुजुर्ग कर रहे हैं।
प्रबंधन पर भेदभाव और साजिश का आरोप
Bokaro आंदोलनकारियों का कहना है कि बोकारो स्टील प्लांट (BSL) प्रबंधन सेक्टर 12 के आवासों को ‘जर्जर’ और ‘क्षतिग्रस्त’ घोषित कर उन्हें खाली कराने पर आमादा है। समिति के सदस्यों का आरोप है कि प्रबंधन अन्य सेक्टरों में तो मरम्मत (Repair) का काम करवा रहा है, लेकिन सेक्टर 12 के साथ जानबूझकर सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है, ताकि पुराने कर्मियों को वहां से बेदखल किया जा सके।
‘घर नहीं छोड़ेंगे, चाहे आत्मदाह करना पड़े’
Bokaro संघर्ष समिति के सक्रिय सदस्य जमुना राम ने कड़े शब्दों में प्रबंधन को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिटायर्ड कर्मी किसी भी कीमत पर अपने घरों को खाली नहीं करेंगे। जमुना राम ने भावुक और कड़े लहजे में कहा, “प्रबंधन की तानाशाही हमें स्वीकार नहीं है। अगर हमें अपनी छत बचाने के लिए आत्मदाह भी करना पड़ा, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। हम इस साजिश का शिकार नहीं बनेंगे।”
आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी
Bokaro भूख हड़ताल पर बैठे बुजुर्गों का कहना है कि यदि प्रबंधन उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं करता और भेदभावपूर्ण रवैया बंद नहीं करता, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। समिति ने चेतावनी दी है कि अगले चरण में वे बिना किसी पूर्व सूचना के बोकारो स्टील के उच्चाधिकारियों के आवासों का घेराव करेंगे। फिलहाल, इन बुजुर्गों के जज्बे ने स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है।
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