23 फरवरी 2025 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला चैंपियंस ट्रॉफी मुकाबला सिर्फ खेल का मैदान नहीं होगा, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव का मंच भी बनेगा। मैदान पर जहाँ खिलाड़ी गेंद और बल्ले से अपनी कला दिखाएँगे, वहीं बाउंड्री के पार फैंस और खिलाड़ियों के परिवार अपनी पोशाकों के जरिए अपनी पहचान और जुनून का प्रदर्शन करेंगे। कुर्ते से लेकर टीम जर्सी तक, ये ड्रेस सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व, परंपरा और उत्साह की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। आइए, इस अनोखे फैशन परिदृश्य में कदम रखें और देखें कि कैसे कपड़े यहाँ एक कहानी बुनते हैं।
स्टैंड्स में रंगों का मेला
दुबई स्टेडियम के स्टैंड्स इस दिन किसी रंगीन कैनवास से कम नहीं होंगे। भारतीय फैंस जहाँ नीले रंग की टीम जर्सी में रोहित शर्मा और विराट कोहली के नाम चमकाएँगे, वहीं पाकिस्तानी फैंस हरे रंग की जर्सी में बाबर आज़म और शाहीन अफरीदी का समर्थन करते नज़र आएँगे। लेकिन यहाँ फैशन सिर्फ जर्सी तक सीमित नहीं है। कई फैंस परंपरागत परिधानों को चुनते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों को उजागर करते हैं।
दुबई में रहने वाली भारतीय प्रवासी शालिनी वर्मा, जो एक बैंकर हैं, कहती हैं, “मैं मैच के लिए नीले रंग का कुर्ता पहनूँगी, जिस पर तिरंगे की कढ़ाई है। यह मेरे लिए भारत का गर्व दिखाने का तरीका है।” दूसरी ओर, शारजाह से आए पाकिस्तानी फैन अली रज़ा बताते हैं, “मैं हरे रंग का शलवार-कमीज़ पहनूँगा, क्योंकि यह मेरे देश का रंग है। ऊपर से टीम की जर्सी डाल लूँगा—परंपरा और टीम सपोर्ट का मिश्रण।” ये पोशाकें सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि एक भावना हैं, जो स्टैंड्स में लहराती झंडों और नारों के साथ तालमेल बिठाती हैं।
खिलाड़ियों के परिवारों का स्टाइल
मैदान के बाहर खिलाड़ियों के परिवार भी इस फैशन परेड का अहम हिस्सा बनते हैं। ये लोग अक्सर वीआईपी बॉक्स या खास स्टैंड्स में बैठते हैं, और उनकी ड्रेस में सादगी के साथ शान का अनोखा संगम दिखता है। भारतीय खिलाड़ियों की पत्नियाँ या माँएँ, जैसे अनुष्का शर्मा या रितिका सजदेह, अक्सर डिज़ाइनर साड़ी या सूट में नज़र आती हैं, जिनमें टीम के रंग—नीला, नारंगी, और सफेद—की झलक होती है। ये परिधान न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत शैली को दर्शाते हैं, बल्कि टीम के लिए उनका समर्थन भी जाहिर करते हैं।
पाकिस्तानी खिलाड़ियों के परिवार भी पीछे नहीं रहते। उनकी पोशाकों में हरे और सफेद रंग का दबदबा होता है, जो अक्सर शलवार-कमीज़ या लहंगे के रूप में सामने आता है। एक पाकिस्तानी फैन, जो पिछले मैचों में वीआईपी स्टैंड में मौजूद था, बताता है, “शाहीन अफरीदी की माँ पिछले टी20 वर्ल्ड कप में हरे रंग का सूट पहनकर आई थीं। यह देखकर लगा कि वे सिर्फ अपने बेटे के लिए नहीं, पूरे देश के लिए चीयर कर रही थीं।” ये परिवार अपनी मौजूदगी और पोशाक से खेल के माहौल में एक खास रंग भरते हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस फैशन की खासियत है परंपरा और आधुनिकता का मेल। जहाँ जर्सी टीम के प्रति वफादारी दिखाती है, वहीं कुर्ते, साड़ियाँ, और शलवार-कमीज़ सांस्कृतिक गहराई को उजागर करते हैं। यूएई में रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी प्रवासियों के लिए यह मौका अपने देश की पहचान को सेलिब्रेट करने का है। दुबई के एक कपड़ा बाज़ार में दुकान चलाने वाले मोहम्मद यूसुफ कहते हैं, “मैच से पहले हरे और नीले रंग के कपड़ों की बिक्री बढ़ जाती है। लोग जर्सी के साथ-साथ ट्रेडिशनल ड्रेस भी खरीदते हैं, ताकि दोनों का मज़ा ले सकें।”
कई फैंस अपने कपड़ों को कस्टमाइज़ भी करते हैं। मिसाल के तौर पर, कुछ भारतीय फैंस जर्सी पर “हिटमैन” या “किंग कोहली” लिखवाते हैं, तो पाकिस्तानी फैंस “बाबर का बॉस” या “शाहीन का शिकार” जैसे नारे छपवाते हैं। ये छोटे-छोटे टच कपड़ों को निजी बना देते हैं, जो उनकी भावनाओं को और गहरा करते हैं।
फैशन में राइवलरी की झलक
भारत-पाकिस्तान की राइवलरी सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि बाउंड्री के फैशन में भी दिखती है। भारतीय फैंस जहाँ तिरंगे के रंगों को अपने कपड़ों में शामिल करते हैं, वहीं पाकिस्तानी फैंस चाँद-सितारे वाले झंडे की छाप लेते हैं। यह एक तरह की मूक टक्कर है—कौन अपनी पहचान को ज़्यादा शानदार तरीके से पेश कर सकता है। शालिनी हँसते हुए कहती हैं, “हमारा नीला उनके हरे को मात देगा—मैदान पर भी और स्टैंड्स में भी।” अली जवाब देते हैं, “हमारा हरा रंग ऐसा है, जो हर नज़र को खींच लेता है।”
यह राइवलरी मज़ेदार भी है। कई बार भारतीय और पाकिस्तानी फैंस एक-दूसरे के कपड़ों की तारीफ करते हुए भी दिखते हैं। दुबई में एक कॉफी शॉप के मालिक राशिद खान बताते हैं, “पिछले मैच में मैंने देखा कि एक भारतीय फैन ने पाकिस्तानी फैन के हरे कुर्ते की तारीफ की, और बदले में उसने उनकी जर्सी को थम्स-अप दिया। ये पल इस राइवलरी को खास बनाते हैं।”
मौसम और माहौल का असर
दुबई की गर्मी और नमी भी इस फैशन को प्रभावित करती है। फरवरी में मौसम ठंडा होता है, जिससे फैंस हल्के कुर्ते, जैकेट्स, और शॉल्स को तरजीह देते हैं। जर्सी के ऊपर शॉल या दुपट्टा डालकर फैंस अपने लुक को पूरा करते हैं। खिलाड़ियों के परिवार भी मौसम को ध्यान में रखते हैं—हल्के कपड़े, सनस्क्रीन, और स्टाइलिश टोपियाँ उनके लुक का हिस्सा बनती हैं। यह सब मिलकर स्टैंड्स को एक फैशन रनवे की तरह बना देता है।
फैशन का भावनात्मक पहलू
ये कपड़े सिर्फ शारीरिक सजावट नहीं, बल्कि भावनाओं का आईना हैं। हर जर्सी, हर कुर्ता, और हर साड़ी में एक कहानी है—किसी की अपने देश से दूरी की याद, तो किसी का अपनी टीम के लिए अटूट समर्थन। एक भारतीय फैन, राहुल मेहता, कहते हैं, “मेरी जर्सी पर कोहली का नंबर 18 है। यह मुझे मेरे स्कूल के दिनों की याद दिलाता है, जब हम उनके शॉट्स की नकल करते थे।” इसी तरह, पाकिस्तानी फैन नादिया बेगम कहती हैं, “मेरी हरी साड़ी मेरी नानी की याद है, जो मुझे क्रिकेट सिखाती थीं।”
बाउंड्री का यह फैशन भारत और पाकिस्तान के फैंस और खिलाड़ियों के परिवारों के लिए सिर्फ कपड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव है। कुर्ते से जर्सी तक, हर पोशाक यहाँ अपनी कहानी कहती है—प्यार, गर्व, और राइवलरी की कहानी। 23 फरवरी को जब स्टेडियम में रोशनी चमकेगी, तो मैदान के बाहर ये रंग-बिरंगे परिधान भी अपनी चमक बिखेरेंगे। यह एक ऐसा दृश्य होगा, जहाँ फैशन और जुनून एक साथ नृत्य करेंगे, और सांस्कृतिक पहचान की झलक हर नज़र को मोह लेगी। तो आप क्या पहनेंगे—अपनी टीम की जर्सी या अपने देश का रंग? इस फैशन की टक्कर में शामिल हों और अपनी पहचान को चमकने दें!





