BY: Yoganand Shrivastva
ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने इतिहास रचते हुए पहली बार एक हिंदू पुजारी को आधिकारिक तौर पर अपनी टीम में शामिल किया है। यह सम्मान हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के गढ़खल निवासी भानु अत्री को मिला है। उनकी इस उपलब्धि पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह क्षण पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है।
आध्यात्मिक सहयोग देने की जिम्मेदारी
भानु अत्री अब रॉयल नेवी में उन अधिकारियों और जवानों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देंगे, जो हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। यह पहली बार है जब नेवी ने किसी गैर-ईसाई पुजारी को इस भूमिका के लिए चुना है। अत्री ने हाल ही में विशेष प्रशिक्षण पूरा किया और अपनी नई जिम्मेदारी संभाली।
कैसा रहा प्रशिक्षण?
भानु अत्री ने छह हफ्ते का ऑफिसर ट्रेनिंग कोर्स पूरा किया। इसमें चार सप्ताह तक युद्धपोत एचएमएस आयरन ड्यूक पर समुद्र में जीवित रहने का प्रशिक्षण और तीन सप्ताह तक सैन्य पुजारी की भूमिका से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग शामिल थी। अत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा –
“रॉयल नेवी में पहला हिंदू पुजारी बनना मेरे लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है।”
मुख्यमंत्री सुक्खू की शुभकामनाएं
सीएम सुक्खू ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
“गढ़खल, सोलन निवासी भानु अत्री जी को ब्रिटेन की रॉयल नेवी में हिंदू चैप्लेन के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई। यह उपलब्धि न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित करने वाली है।”
शिक्षा और परिवारिक पृष्ठभूमि
भानु अत्री का जन्म सितंबर 1986 में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नालवा से पूरी की। इसके बाद संस्कृत कॉलेज, सोलन से शास्त्री की पढ़ाई की और दिल्ली से ज्योतिषाचार्य की डिग्री हासिल की।
वर्ष 2009 में वे लंदन गए और वहां पुरोहित का कार्य करने लगे। वर्तमान में वे पत्नी और बच्चों के साथ वहीं रहते हैं। उनके पिता राम गोपाल अत्री शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त शास्त्री अध्यापक हैं, जबकि माता लीना अत्री गृहिणी हैं।





