BY
Yoganand Shrivastava
Azamgarh : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ब्रिटेन की नागरिकता रखने वाले मौलाना शमशुल हुदा के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित मुबारकपुर में उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपी मौलाना न केवल भारत सरकार से अवैध रूप से वेतन ले रहा था, बल्कि मदरसों की आड़ में संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी संलिप्त था।
फर्जी पहचान पत्र और ‘मौलाना दादा’ का डिजिटल नेटवर्क
Azamgarh ED सूत्रों के अनुसार, शमशुल हुदा के पैतृक घर से कई अलग-अलग पहचान पत्र और धार्मिक साहित्य बरामद किया गया है। मोबाइल की डिजिटल स्कैनिंग से यह खुलासा हुआ है कि वह व्हाट्सएप ग्रुप्स में ‘मौलाना दादा’ के कोड नाम से सक्रिय था। सबसे गंभीर आरोप यह है कि शमशुल मदरसों के माध्यम से गरीब तबके और अन्य समुदायों के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाता था। पुलिस अब उसके डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है ताकि उसके नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके।
ब्रिटेन की नागरिकता और भारत सरकार से सैलरी का ‘गड़बड़झाला’
Azamgarh शमशुल हुदा के आर्थिक अपराधों की कहानी 2007 में शुरू हुई जब वह ब्रिटेन चला गया। 2013 में वहां की नागरिकता मिलने के बावजूद, उसने आजमगढ़ के ‘मदरसा अशरफिया’ में सहायक अध्यापक के पद से इस्तीफा नहीं दिया। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से वह मेडिकल लीव के नाम पर अनुपस्थित रहकर भी वेतन लेता रहा। जांच के मुताबिक, उसने 2017 तक अवैध रूप से करीब 16 लाख रुपये की सैलरी ली और अंत में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) भी हासिल कर ली।
विभागीय साठगांठ और अधिकारियों पर गिरती गाज
Azamgarh इस भ्रष्टाचार में शामिल सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी शासन ने सख्त रुख अपनाया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सहित कई जिलों के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (DMO) को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इन पर आरोप है कि आजमगढ़ में तैनाती के दौरान इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर शमशुल को लाभ पहुँचाया। फिलहाल, ED की टीम मुबारकपुर स्थित आवास पर साक्ष्य जुटा रही है और जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारी संभव है।





