BY
Yoganand Shrivastava
Assam असम के कार्बी आंगलॉन्ग में हुए सुखोई-30 लड़ाकू विमान हादसे ने पूरे देश को गमगीन कर दिया है। इस दुर्घटना में वायुसेना के दो जांबाज अधिकारियों ने अपनी जान गंवाई है। शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर के नागपुर स्थित घर पर जहाँ एक ओर मातम छाया है, वहीं उनके पिता रवींद्र दुरगकर का सीना बेटे की देश के प्रति सेवा और शहादत को देखकर गर्व से चौड़ा है।
बुधवार को हुई थी अंतिम बात, ग्रुप कैप्टन ने दी शहादत की सूचना
Assam शहीद पूर्वेश के पिता और रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी रवींद्र दुरगकर ने रुंधे गले से बताया कि उनकी अपने बेटे से आखिरी बार बात बीते बुधवार को हुई थी। उन्हें क्या पता था कि वह बातचीत आखिरी साबित होगी। शुक्रवार सुबह वायुसेना के ग्रुप कैप्टन ने फोन कर उन्हें इस हृदयविदारक घटना की जानकारी दी। पूर्वेश वर्तमान में असम के तेजपुर में तैनात थे, लेकिन वहां रनवे के काम के चलते वे अस्थायी रूप से जोरहाट एयरबेस से अपनी सेवाएं दे रहे थे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के हीरो थे पूर्वेश, देश सेवा का था अटूट जुनून
Assam पूर्वेश के पिता ने बताया कि उनका बेटा भारतीय वायुसेना का हिस्सा होने पर बेहद गौरवान्वित महसूस करता था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि पूर्वेश ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे महत्वपूर्ण मिशन में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। वह अपने साथी पायलटों और टीम की हमेशा सराहना करते थे। उनके पिता के अनुसार, पूर्वेश का समर्पण केवल उनकी नौकरी तक सीमित नहीं था, बल्कि वह दिल से माँ भारती की रक्षा के लिए समर्पित थे।
रक्षा मंत्री ने दी श्रद्धांजलि: “साहस और सेवा को याद रखेगा राष्ट्र”
Assam इस हादसे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने शहीद स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन वीर योद्धाओं के साहस को राष्ट्र हमेशा कृतज्ञता के साथ याद रखेगा। राजनाथ सिंह ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।





