विश्व लिवर दिवस पर अमित शाह का स्वास्थ्य मंत्र: “अब न एलोपैथिक दवा, न इंसुलिन – सिर्फ सही दिनचर्या”

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली: विश्व लिवर दिवस के अवसर पर लिवर और पित्त विज्ञान संस्थान (ILBS) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी जीवनशैली में आए बदलावों को साझा करते हुए युवाओं को प्रेरित करने वाली बातें कहीं। उन्होंने बताया कि मई 2020 से उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी और आज वे किसी भी एलोपैथिक दवा और इंसुलिन के बिना स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

अमित शाह ने युवाओं को दिया सेहतमंद जीवन का मंत्र

अमित शाह ने मंच से कहा,

“मई 2020 से मैंने अपने जीवन में बड़ा परिवर्तन किया है। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, भरपूर पानी पीना और नियमित व्यायाम ने मेरी सेहत को पूरी तरह बदल दिया है। आज मैं किसी दवा या इंसुलिन के बिना बिल्कुल स्वस्थ हूं। मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूं कि वे रोज़ दो घंटे शारीरिक व्यायाम करें और कम से कम छह घंटे की नींद ज़रूर लें। यह मैंने स्वयं अनुभव किया है और यही अनुभव आज मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवा भारत के भविष्य की नींव हैं और उन्हें अपनी सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें आने वाले कई दशकों तक देश की सेवा करनी है।


फैटी लिवर: एक बढ़ती हुई खामोश बीमारी

कार्यक्रम में लिवर से जुड़ी एक गंभीर समस्या गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD) पर भी चर्चा हुई। यह बीमारी आज तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है, खासकर शहरी क्षेत्रों में, जहां गलत खानपान और गतिहीन जीवनशैली इसका मुख्य कारण बनते जा रहे हैं।

इस साल की थीम‘भोजन ही औषधि है’ – इस बात पर ज़ोर देती है कि हम जो खाते हैं, वही हमारे स्वास्थ्य का आधार बनता है।

भारत सरकार ने पिछले वर्ष NAFLD को एक प्रमुख गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Disease – NCD) के रूप में मान्यता दी थी, जिससे इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने और निवारण के प्रयासों में तेजी आई है।


क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?

प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार,

“NAFLD को एक मूक महामारी माना जा सकता है। इसके संक्रमण की दर 9% से 32% के बीच है और यह व्यक्ति की उम्र, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और निवास स्थान जैसे कारकों पर निर्भर करती है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के बढ़ते मामलों के पीछे बैठे रहने की आदत, असंतुलित आहार और फिजिकल एक्टिविटी की कमी बड़ी वजह है। 10 में से 1 से 3 लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं – यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है।

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