BY: MOHIT JAIN
अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने मिलकर दक्षिण कोरिया के पास बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इस कदम ने उत्तर कोरिया को नाराज़ कर दिया है। उसने इसे “लापरवाह शक्ति प्रदर्शन” कहते हुए चेतावनी दी है।
अभ्यास का मकसद
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘फ्रीडम एज’ नाम का यह अभ्यास तीनों देशों की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
- समुद्र, वायु और साइबर क्षेत्र में संयुक्त ताकत बढ़ाना
- उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल खतरे का मुकाबला
- तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना
कहाँ और कब हो रहा है अभ्यास
- यह अभ्यास जेजू द्वीप (दक्षिण कोरिया) के पास चल रहा है।
- शुक्रवार तक चलेगा।
- इसमें अमेरिकी मरीन, वायुसेना के हवाई जहाज, बैलिस्टिक मिसाइल और एयर डिफेंस अभ्यास शामिल हैं।
- मेडिकल तैयारी और समुद्री अभियानों की ट्रेनिंग भी होगी।
इसे अब तक का सबसे उन्नत त्रिपक्षीय रक्षा अभ्यास माना जा रहा है।
उत्तर कोरिया क्यों नाराज़
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने सरकारी मीडिया के जरिए कहा –
“उत्तर कोरिया के आसपास किया गया यह लापरवाह शक्ति प्रदर्शन अंत में उनके लिए ही बुरे नतीजे लाएगा।”
उन्होंने हाल ही में हुए आयरन मेस टेबलटॉप अभ्यास पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि उत्तर कोरिया ऐसे अभ्यासों के जवाब में हथियारों के परीक्षण करता रहा है।
पहले भी दी थी धमकी
उत्तर कोरिया पहले भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त अभ्यासों पर चेतावनी दे चुका है।
हाल में उसने कहा था कि अगर अमेरिका दक्षिण कोरिया में लंबी दूरी के बमवर्षक विमान भेजेगा तो जवाबी कार्रवाई होगी।
उत्तर कोरिया का मानना है कि ये अभ्यास उस पर हमले की तैयारी के लिए होते हैं।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का तर्क
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास केवल सुरक्षा और बचाव के लिए हैं।
लेकिन उत्तर कोरिया इसे आक्रमण का अभ्यास मानता है।
- अमेरिका और पश्चिमी देश उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्र के लिए खतरा बताते हैं।
- उत्तर कोरिया अपने परमाणु जखीरे को लगातार आधुनिक बनाने में जुटा है।
इस अभ्यास से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। जहां एक ओर इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बताया जा रहा है, वहीं उत्तर कोरिया इसे अपने खिलाफ साजिश मानकर चेतावनी दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति क्षेत्रीय शांति पर असर डाल सकती है।पान के इस संयुक्त सैन्य अभ्यास ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। जहां एक ओर यह अभ्यास सुरक्षा और रक्षा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं उत्तर कोरिया इसे अपने खिलाफ आक्रामक तैयारी मानकर चेतावनी दे रहा है। आने वाले दिनों में इस अभ्यास के परिणाम क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा असर डाल सकते हैं।





