वेब सीरीज पर बोले अखिलेंद्र मिश्रा: परिवार संग न देख सकें ऐसा कंटेंट नहीं करूंगा

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image

मशहूर रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा हाल ही में भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने वेब सीरीज की दुनिया, हिंदी भाषा और थिएटर को लेकर कई अहम बातें साझा कीं।
इस दौरान उन्होंने समाज, कला और व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर दृष्टिकोण रखा। साथ ही उन्होंने हिंदी कविता सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वेब सीरीज में नहीं की अश्लीलता बर्दाश्त

अखिलेंद्र मिश्रा ने साफ कहा कि वे अब तक किसी भी वेब सीरीज में इसलिए शामिल नहीं हुए, क्योंकि अधिकतर कंटेंट में गाली-गलौच और अश्लीलता भरी होती है। उन्होंने कहा:

“जो काम मैं अपने परिवार के साथ बैठकर नहीं देख सकता, वह करना ही क्यों चाहिए?”
पैसा, शोहरत, गाड़ी, बंगला – ये सब मिल सकते हैं, लेकिन एक कलाकार का समाज के प्रति भी उत्तरदायित्व होता है।

हालांकि, उन्होंने हाल ही में एक पारिवारिक वेब सीरीज ‘पिरामिड’ में काम करना शुरू किया है, जिसे वे अपने परिवार के साथ भी देख सकते हैं।

“हम क्या परोस रहे हैं समाज को?”

उन्होंने सवाल उठाया कि हमें यह सोचना चाहिए कि हमारी कला समाज पर क्या असर डाल रही है।
“अगर हमसे गलती से भी कोई गलत शब्द निकल जाए, तो अफसोस होना चाहिए।”
यह विचार एक कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।

हिंदी कविता के जरिए किया भावनाओं का संप्रेषण

भोपाल के कार्यक्रम में अखिलेंद्र मिश्रा ने हिंदी की महत्ता को उजागर करते हुए एक ओजपूर्ण कविता सुनाई:

“मैं संस्कृति की स्वस्ती हूं,
मैं सभ्यता की प्रशस्ति हूं,
मैं भारत की रीढ़ की अस्थि हूं…
मैं हिंदी हूं।”

इस कविता ने दर्शकों में गर्व और भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर दिया।
उन्होंने एक और प्रेरणादायक कविता सुनाई:

“मैं गंग हूं, गंगाल हूं,
गंगा गंगेश हूं,
क्रांति अशेष हूं,
स्वतंत्रता संग्राम का वेश हूं,
मैं संपूर्ण भारत देश हूं —
मैं हिंदी हूं।”

किताब: ‘अभिनय, अभिनेता और अध्यात्म’

अखिलेंद्र मिश्रा ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले उनकी किताब ‘अभिनय, अभिनेता और अध्यात्म’ प्रकाशित हुई है।

  • यह किताब हिंदी में पहली बार अभिनय और आध्यात्म के मेल पर केंद्रित है।
  • वे देशभर के संस्थानों में जाकर छात्रों से संवाद कर रहे हैं – जैसे:
    • पुणे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट
    • एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा)
    • बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी

उनका मानना है:

“अभिनय सिर्फ कला नहीं है, यह आत्मिक साधना है। एक अभिनेता को अपने भीतरी स्वरूप से भी जुड़ना होता है।”

भोपाल और युवाओं से जुड़ाव

भोपाल में मौजूद ‘अविराम थिएटर ग्रुप’ से उनका गहरा रिश्ता है।
यहां वे स्थानीय युवाओं से संवाद कर रहे हैं, उन्हें अभिनय, विचार और जीवन-दृष्टि का मार्गदर्शन दे रहे हैं।

वर्तमान में वे सागर शहर में फिल्म ‘सत्यकथा’ की शूटिंग में व्यस्त हैं और पिछले 10 दिनों से मध्यप्रदेश में हैं।


अखिलेंद्र मिश्रा का दृष्टिकोण स्पष्ट है—कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम है।
वे वेब सीरीज जैसे माध्यमों में भी गुणवत्ता, संस्कृति और परिवारिक मूल्यों की अहमियत को सबसे ऊपर रखते हैं।

Vintage Songs : 60 के दशक के ये 10 सदाबहार गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं

Vintage Songs : 1960 का दशक हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्णिम दौर

IMA Parade: देहरादून IMA की पासिंग आउट परेड में 515 कैडेट्स ने दिखाया दमखम

IMA Parade: देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में आयोजित पासिंग आउट

Naxal Operation: गरियाबंद में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता, जंगल से नक्सलियों का संदिग्ध डम्प बरामद

Naxal Operation: गरियाबंद जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षा बलों

IND- AFG पहला वनडे आज, नहीं खेलेंगे विराट-हार्दिक, जानें कब-कहां देखें लाइव मुकाबला

IND- AFG: भारतीय क्रिकेट टीम आज से अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज