Isa Ahmad
मुरादाबाद जिले के थाना बिलारी क्षेत्र के कई गांवों—तिसावा, चांदपुर, चांदपुर गणेश और धर्मपुर कला—में इन दिनों प्रतिबंधित मछलियों के अवैध पालन का गंदा खेल खुलेआम चल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इन तालाबों में मछलियों को खिलाने के लिए वेस्टेज मीट यानी जानवरों का सड़ा-गला मांस इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल चुकी है और गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
वेस्टेज मीट से फैल रहा संक्रमण और जल प्रदूषण
इन गांवों के तालाबों के आसपास सड़े मांस के ढेर लगे हुए हैं, जिनसे मक्खियों, मच्छरों और जंगली जानवरों की भरमार हो गई है। नतीजतन ग्रामीणों में चर्म रोग, दमां, खांसी, सांस की तकलीफ और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं। कई लोग महीनों से इलाज करा रहे हैं, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों का पानी अब काला पड़ चुका है, उसमें तेलिया परत जम गई है और सड़े मांस की बदबू तक आने लगी है। इतना ही नहीं, पास के कुएं और हैंडपंप का पानी भी दूषित हो गया है, जिससे पीने योग्य पानी की भारी समस्या खड़ी हो गई है।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़े कारोबारियों के हौसले
ग्रामीणों ने कई बार मत्स्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो किसी अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया और न ही तालाबों को बंद कराने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को इन तालाबों के पास से गुजरना पड़ता है, जहां सड़े मांस की बदबू और कीड़ों की भरमार से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। महिलाएं और बच्चे दम घुटने जैसी स्थिति में उस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस अवैध मछली पालन पर रोक नहीं लगी और वेस्टेज मीट का उपयोग बंद नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने जिलाधिकारी मुरादाबाद और मत्स्य विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल जांच टीम गठित कर इन अवैध तालाबों को सील किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।





