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ई-कॉमर्स में COD पर एक्स्ट्रा चार्ज: सरकार ने शुरू की जांच, जानें क्या हैं नियम

ई-कॉमर्स में COD पर एक्स्ट्रा चार्ज: सरकार ने शुरू की जांच, जानें क्या हैं नियम

BY: MOHIT JAIN

सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह एक तरह का ‘डार्क पैटर्न’ है। इस साल मिली शिकायतों के बाद विभाग ने जांच तेज कर दी है।

जोशी के मुताबिक, सीओडी पर अतिरिक्त शुल्क लेना ‘ड्रिप प्राइसिंग’ का उदाहरण है, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत 13 डार्क पैटर्न्स में से एक है। जुलाई में कई प्लेटफॉर्म्स, जैसे जेप्टो, पर सोशल मीडिया शिकायतें आईं कि चेकआउट पर ‘कैश हैंडलिंग फीस’ जोड़ी जा रही थी।

डार्क पैटर्न्स क्या हैं?

  • ड्रिप प्राइसिंग: ऑर्डर के अंतिम चरण में छिपे शुल्क जोड़ना।
  • फॉल्स अर्जेंसी: जैसे ‘केवल 1 आइटम बचा’ जैसे झूठे संदेश।
  • सब्सक्रिप्शन ट्रैप्स: आसानी से रद्द न होने वाली मेंबरशिप।

इनमें COD पर एक्स्ट्रा चार्ज शामिल है। दोषी पाए जाने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जा सकती है।

ऑनलाइन खरीदारी में सावधानियां

  1. डिफेक्टिव या अलग प्रोडक्ट मिले तो प्रोडक्ट की फोटो और वीडियो बनाएं और शॉपिंग एप पर रिटर्न-रिप्लेसमेंट रिक्वेस्ट करें।
  2. बिना कारण रिटर्न: वेबसाइट की रिटर्न पॉलिसी देखें, कुछ पर ‘नो-क्वेश्चन रिटर्न’ होता है।
  3. रिफंड में देरी: ऑर्डर की रसीद, चैट/कॉल स्क्रीनशॉट और ईमेल प्रूफ संभालें। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता फोरम की मदद लें।
  4. शॉपिंग के दौरान ध्यान दें:
    • सुरक्षित और विश्वसनीय वेबसाइट चुनें (HTTPS)।
    • प्रोडक्ट डिस्क्रिप्शन पढ़ें।
    • कीमतों की तुलना करें।
    • सेफ पेमेंट मेथड का उपयोग करें।
    • रिटर्न, रिफंड और डिलीवरी शर्तें समझें।
  5. ऑनलाइन और ऑफलाइन अधिकार: दोनों जगह उपभोक्ता के समान कानूनी अधिकार हैं, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 लागू होता है।

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