आठ दिन, चार हजार से ज्यादा चालान: ग्वालियर में ट्रैफिक पुलिस का रिकॉर्ड तोड़ अभियान

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आठ दिन, चार हजार से ज्यादा चालान: ग्वालियर में ट्रैफिक पुलिस का रिकॉर्ड तोड़ अभियान

BY: MOHIT JAIN

ग्वालियर शहर की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस लगातार अभियान चला रही है। चौराहों और प्रमुख मार्गों पर नियम तोड़ने वालों पर धरपकड़ जारी है। आठ दिन के भीतर पुलिस ने 4,147 वाहन चालकों को पकड़ा और उनसे करीब 16 लाख रुपये जुर्माना वसूला।

सबसे ज्यादा मामले बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और रॉन्ग साइड वाहन चलाने के सामने आए। कार्रवाई तेज होने के बावजूद शहर की हर सड़क पर इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

किन-किन पर हुई कार्रवाई?

पिछले आठ दिनों में ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग श्रेणियों में चालान किए।

  • बिना हेलमेट: 2,788 चालकों से 8.37 लाख रुपये जुर्माना
  • रॉन्ग साइड ड्राइविंग: 541 चालकों से 2.43 लाख रुपये वसूले
  • बिना सीट बेल्ट: 588 चालकों से 2.94 लाख रुपये जुर्माना
  • ओवरस्पीड: 66 वाहन चालक पकड़े गए
  • शराब पीकर गाड़ी चलाने पर: सिर्फ 21 वाहन चालकों पर कार्रवाई

यह आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट और सीट बेल्ट जैसी बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, ओवर स्पीड और शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसे घातक कारणों पर कार्रवाई कम दिखाई दी।

VIP मूवमेंट के बीच भी जारी रहा अभियान

सोमवार को केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम और शहर में वीआईपी मूवमेंट होने के बावजूद पुलिस ने अभियान नहीं रोका।

  • झांसी रोड क्षेत्र में केपी तोमर की टीम
  • कंपू-लश्कर क्षेत्र में धनंजय शर्मा की टीम
  • गोला का मंदिर क्षेत्र में अभिषेक रघुवंशी की टीम

इन टीमों ने मिलकर 488 चालकों को पकड़ा और 1.83 लाख रुपये का जुर्माना वसूला।

सवाल उठता है – क्या चालान से सुधरेंगे हालात?

ग्वालियर की ट्रैफिक पुलिस बड़ी संख्या में चालान कर रही है और लाखों रुपये वसूल भी हो रहे हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्या सिर्फ चालान से शहर की ट्रैफिक संस्कृति सुधरेगी?

  • बिना हेलमेट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग हर सड़क पर आम नज़ारा है।
  • लोग जुर्माना भरकर भी बार-बार वही गलती दोहरा रहे हैं।
  • सड़क हादसों के प्रमुख कारण – ओवरस्पीड और शराब पीकर वाहन चलाना – पर सख्ती की कमी साफ नजर आती है।

ग्वालियर में ट्रैफिक पुलिस का अभियान जरूर सक्रिय है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि नियम तोड़ने वालों की मानसिकता अब भी नहीं बदली है। सड़क सुरक्षा सिर्फ चालान तक सीमित न रहकर लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाने पर ही निर्भर करती है।

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