BY: Yoganand Shrivastava
नई दिल्ली: भारत सरकार की स्वास्थ्य नियामक संस्था डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने फिजियोथेरेपिस्ट्स को अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ उपाधि का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी है। DGHS का कहना है कि ऐसा करने से मरीजों में भ्रम पैदा हो सकता है और वे यह समझ सकते हैं कि फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर हैं, जबकि वे बीमारियों का निदान करने और प्राइमरी केयर प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित नहीं होते। DGHS ने इसे मेडिकल डिग्री एक्ट का उल्लंघन बताया है और चेतावनी दी है कि कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
DGHS ने क्यों किया ऐलान
DGHS ने फरवरी 2025 में जारी ‘कॉम्पिटेंसी बेस्ड करिकुलम फॉर फिजियोथेरेपी’ में सुझाए गए बदलाव पर आपत्ति जताई। उस पाठ्यक्रम में कहा गया था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ और पीछे ‘PT’ (Physiotherapist) लिख सकते हैं। DGHS ने इसे गलत बताया और तुरंत सुधार की हिदायत दी। DGHS ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टरों की तरह प्रशिक्षण नहीं लेते, इसलिए वे ‘डॉ.’ उपाधि का इस्तेमाल न करें। ऐसा करने से न केवल मरीज भ्रमित हो सकते हैं बल्कि झोलाछाप डॉक्टरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
डॉक्टरों के रेफरल पर ही काम करें फिजियोथेरेपिस्ट
DGHS ने यह भी कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट केवल डॉक्टरों के रेफरल पर ही काम करें। वे प्राइमरी केयर प्रोवाइडर नहीं बन सकते। यदि वे गलत तरीके से इलाज करते हैं, तो मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। DGHS ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) को लिखे पत्र में यह बात दोहराई।
अदालतों और मेडिकल काउंसिलों के आदेश
DGHS ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि अदालतों और मेडिकल काउंसिलों ने पहले भी फिजियोथेरेपिस्ट्स को ‘डॉ.’ उपाधि का उपयोग नहीं करने के आदेश दिए हैं:
- पटना हाईकोर्ट (2003): फिजियोथेरेपिस्ट ‘डॉ.’ नहीं लिख सकते।
- बेंगलुरु कोर्ट (2020): फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में काम करें, ‘डॉ.’ का इस्तेमाल न करें।
- मद्रास हाईकोर्ट (2022): उपाधि के दुरुपयोग को रोकने का आदेश।
- तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल: कई बार चेतावनी जारी की।
कानूनी चेतावनी
DGHS ने चेतावनी दी कि मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के बिना ‘डॉ.’ उपाधि का इस्तेमाल 1916 के इंडियन मेडिकल डिग्रीज एक्ट के तहत अपराध है। इसमें IMC एक्ट की धारा 6 और 6A के तहत सजा का प्रावधान है। DGHS ने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम में तत्काल सुधार किया जाए और फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए कोई सम्मानजनक लेकिन भ्रमित न करने वाला टाइटल सुझाया जा सकता है।
DGHS का यह कदम मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। फिजियोथेरेपिस्ट्स अपने ज्ञान और विशेषज्ञता के लिए सम्मानित हैं, लेकिन उनका उद्देश्य और क्षमता डॉक्टरों से अलग है। इसलिए उनके नाम के आगे ‘डॉ.’ उपाधि का इस्तेमाल करना न केवल कानूनी तौर पर गलत है बल्कि मरीजों को भी भ्रमित कर सकता है।




