फुलत का मौलाना कलीम सिद्दीकी मदरसे में पढ़ाते-पढ़ाते धर्मांतरण का ठेकेदार बन गया। एटीएस की जांच में मौलाना के ट्रस्ट को खाड़ी देशों से तीन करोड़ रुपये की फंडिंग की जानकारी मिली थी। हवाला के जरिए भी धनराशि मिली। ढाई दशक में ही फुलत के मदरसे का नाम विदेशों तक पहुंच गया। किसान अमीन सिद्दीकी का बेटा कलीम सिद्दीकी पढ़ने में तेज था। प्रारंभिक शिक्षा फुलत गांव के मदरसे में हुई थी। पिकेट इंटर कॉलेज खतौली से विज्ञान वर्ग में इंटर की। मेरठ कॉलेज मेरठ से बीएससी के बाद एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की थी। लेकिन कुछ दिन बाद ही गांव लौटकर पुराने मदरसे फैजुल इस्लाम में दीनी तालीम देने लगा।
साल 1998 में जामिया इमाम शाह वलीउल्लाह इस्लामिया की नींव रखी तो मौलाना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फुलत में मदरसे की ऊंचाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कलीम का नाम बढ़ता गया। ढाई दशक में ही खाड़ी देश के चहेतों में वह शामिल हो गया था। बहरीन समेत अन्य देशों से मदद की पुष्टि हुई थी। इस बीच मौलाना पर धर्मांतरण के मामले भी सामने आए। कई बार आरोप लगे, जिसके बाद सितंबर 2021 में कलीम को पकड़ा गया था। मौलाना कलीम और अन्य आरोपियों के पास से पासपोर्ट, मुहर, साहित्य, महिला व बच्चों की सूची, मोबाइल, लाइसेंस, पहचान पत्र, आधार, पैन, मैरिज सर्टिफिकेट और कनवर्जन रजिस्टर बरामद हुआ था।
इस तरह पकड़ा गया था मौलाना कलीम
फुलत गांव निवासी मौलाना कलीम के खिलाफ एटीएस ने 20 जून 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई। 21 सितंबर 2021 की रात मेरठ के निजी कार्यक्रम में शामिल होने गया था। एटीएस ने दिल्ली-दून हाईवे पर मौलाना के अलावा ड्राइवर सलीम को पकड़ा गया था। मौलाना को साल 2023 में जमानत मिल गई थी।
मौलाना का बेटा अहमद संभाल रहा मदरसा
फुलत के मदरसे के हॉस्टल में फिलहाल विभिन्न राज्यों के 300 छात्र हैं। जबकि आसपास के क्षेत्र के 250 छात्र भी यहां पढ़ते हैं। यहां पर अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू समेत अन्य भाषाओं की शिक्षा का दावा किया जाता है। मौलाना कलीम के बाद उनका बेटा मौलाना अहमद मदरसे की देखरेख कर रहा है। प्रधानाचार्य का दायित्व मौलाना ताहिर के पास है।
गिरफ्तारी से पहले चार दिन रहा फुलत
मौलाना को साल 2023 में अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद वह दिल्ली के शाहीन बाग स्थित अपने घर में रहा। पिछले महीने 28 अगस्त से 31 अगस्त की रात तक मौलाना फुलत में रुका था।
किसे कितनी मिली सजा
धर्मांतरण के मामले में मौलाना कलीम को आजीवन कारावास और उसके ड्राइवर सलीम को 10 साल की सजा हुई है। सलीम के तीन बेटे सााहिब, सुहैब और शाहिद मजदूरी करते हैं। परिवार का कहना है कि सलीम बेकसूर है। उसे बेवजह फंसाया गया है।
धर्मांतरण का यह मुकदमा हुआ था दर्ज
चरथावल कस्बे के अमित प्रजापति पर भी धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। पीड़ित का कहना था कि मई 2014 में आरोपी फुलत स्थित मदरसे में ले गए, जहां मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कलमा पढ़वाकर उसका धर्म परिवर्तन करने के बाद नया नाम अब्दुल्ला रखा। इसके बाद उसे महाराष्ट्र जमात में ले जाकर नमाज व कलमा पढ़ना सिखाया गया। वर्ष 2015 में उसे मदरसा देवबंद में उर्दू व अरबी भाषा सीखने के लिए भेजा गया था।





