BY: Yoganand Shrivastva
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को बड़ी राहत देते हुए उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। यह मामला साल 2014 में अनुयायियों की मौत से जुड़ी घटना का है। सात साल पहले इस मामले में रामपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
2018 में हुई थी सजा की घोषणा
अक्टूबर 2018 में हिसार की अदालत ने रामपाल और उनके कई समर्थकों को हत्या, बंधक बनाने और आपराधिक साजिश के आरोपों में दोषी ठहराया था। यह केस हिसार जिले के बरवाला थाने में 19 नवंबर 2014 को दर्ज किया गया था।
पुलिस और अनुयायियों के बीच हुई थी हिंसक झड़प
2014 में बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस और अनुयायियों के बीच हुई झड़प में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
हाई कोर्ट में दायर की गई थी याचिका
रामपाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की मांग की थी। जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश पारित करते हुए सजा पर रोक लगाने का निर्णय सुनाया।





