अफगानिस्तान में फिर आया भूकंप: 4.8 तीव्रता से कांपी धरती, अब तक 1400 से ज्यादा मौतें

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अफगानिस्तान में फिर आया भूकंप: 4.8 तीव्रता से कांपी धरती, अब तक 1400 से ज्यादा मौतें

भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में गुरुवार को फिर से भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 4.8 तीव्रता का था और 135 किलोमीटर की गहराई में दर्ज हुआ। यह झटका सुबह 10:40 बजे आया।

इससे पहले बुधवार देर रात 4.3 तीव्रता का भूकंप और मंगलवार को दक्षिण-पूर्वी हिस्से में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था। रविवार को जलालाबाद में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई थी।

बढ़ रहा है मौत और घायलों का आंकड़ा

  • अब तक 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
  • 3200 से ज्यादा लोग घायल हैं।
  • ज्यादातर लोग रात में सो रहे थे, इसलिए इमारतों के मलबे में दब गए।

क्यों खतरनाक होते हैं उथले भूकंप?

विशेषज्ञों का कहना है कि उथले भूकंप गहरे भूकंपों से ज्यादा खतरनाक होते हैं।

  • सतह तक पहुंचने की दूरी कम होती है।
  • कंपन ज्यादा महसूस होता है।
  • इमारतों को भारी नुकसान होता है।
  • हताहतों की संख्या भी बढ़ जाती है।

राहत और बचाव कार्य तेज

खामा प्रेस के अनुसार:

  • वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने कुनार और नंगरहार प्रांतों में आपातकालीन मदद भेजी।
  • शुरुआती सहायता में खाद्य सामग्री और हाई-एनर्जी बिस्किट शामिल हैं।
  • अतिरिक्त उड़ानों से और मदद पहुंचाई जाएगी।

WFP के क्षेत्रीय निदेशक हैराल्ड मैनहार्ड्ट ने बताया कि हालात बेहद भयावह हैं।

“घर मलबे में बदल गए हैं, सड़कें टूट चुकी हैं और लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं। बचाव कार्य बेहद कठिन है।”

भारत भी आया मदद के लिए आगे

भारत ने अफगानिस्तान को बड़ी मानवीय सहायता भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि मंगलवार को काबुल में भारतीय राहत सामग्री पहुंचाई गई।

  • 21 टन राहत सामग्री भेजी गई, जिसमें शामिल हैं:
    • कंबल और टेंट
    • दवाइयां और चिकित्सा सामग्री
    • स्वच्छता किट, हैंड सैनिटाइजर, ORS
    • पानी के भंडारण टैंक, पोर्टेबल प्यूरीफायर
    • स्लीपिंग बैग, व्हीलचेयर और जनरेटर

अफगानिस्तान में भूकंप का यह सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। बार-बार झटकों ने हजारों लोगों की जान ले ली है और लाखों प्रभावित हुए हैं। भारत सहित कई देश मदद भेज रहे हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका और टूटी सड़कें राहत कार्य में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

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